भारत छोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर अभिनेता इमरान खान की याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई
भाषा
- 19 Oct 2026, 12:42 PM
- Updated: 12:42 PM
मुंबई, 19 अक्टूबर (भाषा) मुंबई में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के कारण 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के निर्देश को चुनौती देने वाली अभिनेता और अमेरिकी नागरिक इमरान खान की याचिका पर मुंबई उच्च न्यायालय 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने और समय का अनुरोध किया क्योंकि उन्हें याचिका की प्रति सोमवार सुबह ही मिली थी।
इस पर अदालत ने कहा कि वह 26 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई करेगा।
धोंड ने जल्द से जल्द सुनवाई की तारीख का अनुरोध करते हुए कहा कि नोटिस के अनुसार खान को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने के लिए कहा गया है।
इसके बाद अदालत ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता (खान) के खिलाफ कोई और आपराधिक मामला लंबित है, जिस पर धोंड ने 'नहीं' में जवाब दिया।
धोंड ने कहा, ''उनका (खान का) कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज या लंबित नहीं है। वह दो साल की उम्र से ही भारत में रह रहे हैं। उन्होंने किसी भी विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा भी नहीं लिया था। वह अभी आधे रास्ते तक ही पहुंचे थे कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में छोड़ दिया।''
इसके बाद अदालत ने कहा कि 26 अक्टूबर को सुनवाई की जा सकती है। अदालत ने खान को निर्देश दिया कि वह महाराष्ट्र सरकार को याचिका में प्रतिवादी के तौर पर शामिल करें।
अभिनेता (43) को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि उन्होंने किसी भी सभा में हिस्सा नहीं लिया था और प्रदर्शन के आयोजकों से उनका कोई संबंध नहीं था।
उनके वकील जुल्फिकार मेमन ने बताया कि खान ने 17 अक्टूबर को उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसी दौरान उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) से कारण बताओ नोटिस भी मिला, जिसमें उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनका प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) का दर्जा रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
अभिनेता ने अपनी याचिका में कहा कि मुंबई पुलिस द्वारा जारी किया गया यह नोटिस ''गैर-कानूनी, मनमाना, अनुचित और कठोर'' है।
वकील मेमन और एमजेडएम लीगल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि पुलिस का नोटिस "स्पष्ट रूप से बिना सोच-विचार के जारी किया गया है और एक सार्वजनिक हस्ती होने के कारण खान को मनमाने ढंग से निशाना बनाया गया है।"
खान ने नोटिस को रद्द करने की मांग की और साथ ही अदालत से अनुरोध किया कि उनकी याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक इस नोटिस के अमल पर रोक लगाई जाए और अधिकारियों को उनके खिलाफ कोई भी कठोर कदम उठाने से रोका जाए।
याचिका में कहा गया है, ''यह नोटिस न केवल पूरी तरह से अनुचित है बल्कि अगर इसे लागू किया जाता है तो यह 'प्राकृतिक न्याय' के उन सिद्धांतों को ही बेमानी बना देगा जिन्हें बनाए रखना अधिकारियों का कर्तव्य है।''
मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान खान को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उस प्रदर्शन के समर्थन में आयोजित किया गया था जिसमें मतदान सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को लेकर सीईसी कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।
अभिनेता ने दावा किया कि सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित करने में शामिल किसी भी संगठन या संस्था के साथ उनका कोई लेना-देना, जुड़ाव या संबंध नहीं है।
पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने आव्रजन और विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा सात (दो) (सी) और धारा 29 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खान को देश छोड़ने का आदेश दिया। ये धाराएं सरकार को विदेशी नागरिकों की आवाजाही सीमित करने और उन्हें अनिवार्य रूप से देश से बाहर भेजने का अधिकार देती हैं।
धारा सात (दो) (सी) के तहत सरकार किसी विदेशी नागरिक की मौजूदगी पर रोक लगाने, उसे नियंत्रित करने या सीमित करने के निर्देश जारी कर सकती है। इसके तहत अधिकारियों को किसी व्यक्ति को यह निर्देश देने का विशेष अधिकार है कि वह ''भारत में या उसके किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में नहीं रहेगा।''
धारा 29 के तहत अधिनियम के किसी प्रावधान, नियम या आदेश का उल्लंघन करने अथवा सुरक्षा संबंधी प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर सरकार किसी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने का निर्देश दे सकती है।
मशहूर अभिनेता आमिर खान के भांजे इमरान खान कई हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उन्हें 28 अक्टूबर या उससे पहले देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर धारा 29 के तहत निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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