दिल्ली-एनसीआर में शहरी विस्तार 2033 तक 28 प्रतिशत भूमि पर होगा
अमित देवेंद्र
- 23 Aug 2025, 08:03 PM
- Updated: 08:03 PM
(वर्षा सागी)
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में निर्मित क्षेत्र 2023 में 3,386.76 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2033 तक 3,868.28 वर्ग किलोमीटर हो जाने का अनुमान है। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा शहरीकृत हो जाएगा, जो 2023 के स्तर से 481.5 वर्ग किलोमीटर या लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। यह बात एक नये अध्ययन में सामने आयी है।
निर्मित क्षेत्र वह भूमि है जिस पर मकान, सड़क, कारखाने और अन्य कंक्रीट संरचना निर्मित होती है।
‘फोरकास्टिंग अर्बन एक्सपैन्शन इन दिल्ली-एनसीआर: इंटीग्रेटिंग रिमोट सेंसिंग, मशीन लर्निंग एंड मार्कोव चेन सिमुलेशन' शीर्षक वाला यह शोध ‘जियोजर्नल’ में प्रकाशित हुआ है। यह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान स्कूल के प्रोफेसर और अन्य विद्वानों द्वारा किया गया था।
इसमें 2003 और 2023 के बीच भूमि उपयोग और भूमि आवरण में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है और 2033 के लिए अनुमान प्रस्तुत किए गए हैं।
अध्ययन के अनुसार, 2033 तक कृषि भूमि घटकर 9,153.1 वर्ग किलोमीटर रह जाने की उम्मीद है। यह 2023 की तुलना में 477.6 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्शाता है। वन क्षेत्र 282.9 वर्ग किलोमीटर से थोड़ा कम होकर 281.3 वर्ग किलोमीटर हो सकता है।
जलाशयों का क्षेत्रफल 101.09 वर्ग किलोमीटर से घटकर 100.04 वर्ग किलोमीटर रह जाने की आशंका है। खुली भूमि 24.11 वर्ग किलोमीटर से घटकर 21.83 वर्ग किलोमीटर रह सकती है। झाड़ीदार भूमि केवल एक वर्ग किलोमीटर बढ़कर 329.5 वर्ग किमी हो सकती है।
अध्ययन में कहा गया है कि मध्य दिल्ली में क्षैतिज विस्तार के लिए बहुत कम जगह बची है। उत्तर, पश्चिम, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम के बाहरी इलाकों में सबसे ज़्यादा विकास हो रहा है।
इसमें कहा गया है कि इन क्षेत्रों में कृषि भूमि और झाड़ीदार भूमि की जगह आवासीय कॉलोनियां, औद्योगिक क्षेत्र और परिवहन नेटवर्क विकसित हो गए हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि दक्षिण, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर में झाड़ीदार भूमि का शहरीकृत क्षेत्रों में एक प्रमुख बदलाव दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि मध्य और पूर्वी दिल्ली में केवल मामूली बदलाव देखे गए।
वर्ष 2003 और 2023 के बीच, निर्मित क्षेत्र 1,893.64 वर्ग किलोमीटर या क्षेत्र के 13.77 प्रतिशत से बढ़कर 3,386.76 वर्ग किलोमीटर या 24.62 प्रतिशत हो गया।
अध्ययन में कहा गया है कि यह दो दशकों में लगभग 1,500 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि थी। इसमें कहा गया है कि सबसे तेज वृद्धि 2003 और 2013 के बीच हुई, जब निर्मित क्षेत्रों में 1,011 वर्ग किलोमीटर या 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अनुसार 2013 से 2023 तक, यह वृद्धि 482 वर्ग किलोमीटर या 16.6 प्रतिशत रही।
अध्ययन में दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, झज्जर, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के 13,754 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के उपग्रह चित्रों का उपयोग किया गया।
ये चित्र प्रत्येक वर्ष मई में लिए गए ताकि मानसून-पूर्व मौसम में बादलों और धुंध से बचा जा सके।
भूमि की छह श्रेणियों का मानचित्रण किया गया, जिनमें निर्मित क्षेत्र, कृषि भूमि, वन भूमि, झाड़ियां, जलाशय और खुली भूमि शामिल हैं।
वर्ष 2033 के लिए अनुमान ‘सेलुलर ऑटोमेटा-आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क’ मॉडल का उपयोग करके लगाए गए। इसके लेखकों ने कहा कि कृषि भूमि और जंगलों की कीमत पर स्थायी निर्मित क्षेत्रों का तेजी से प्रसार जैव विविधता, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बढ़ते निर्मित आवरण ने पहले ही भूमि की सतह के तापमान में वृद्धि कर दी है।
अध्ययन में सिफारिश की गई है कि नीति निर्माता शहर के ‘मास्टर प्लान’ में इस तरह के डेटा का उपयोग करें, ताकि भविष्य का विकास 'टिकाऊ शहर और समुदायों' को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 11 के सतत लक्ष्यों के अनुरूप हो सके।
भाषा अमित