तमिलनाडु में त्रिशंकु स्थिति: विजय की टीवीके को समर्थन पर द्रविड़ गठबंधनों में मतभेद
मनीषा
- 06 May 2026, 01:06 PM
- Updated: 01:06 PM
चेन्नई, छह मई (भाषा) तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव में किसी भी एक दल को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य में द्रविड़ दलों के नेतृत्व वाले गठबंधनों में विजय की अगुवाई वाली पार्टी को बाहरी समर्थन देने के मुद्दे पर मतभेद उभर आए हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) दोनों ही असहज हैं, क्योंकि कांग्रेस और अन्नाद्रमुक के एक वर्ग ने विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) को सरकार बनाने में बाहरी समर्थन देने की इच्छा जताई है।
चुनाव के बाद टीवीके की राजनीतिक संभावनाएं दोनों द्रविड़ दलों के गठबंधनों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती दिख रही हैं, जिससे विभाजन की अटकलें लगने लगी हैं।
अन्ना द्रमुक के टिकट पर लालगुड़ी से जीतने वाली लीमा रोज मार्टिन ने कहा कि टीवीके को समर्थन देने पर बातचीत चल रही है। उनके दामाद आधव अर्जुन टीवीके के महासचिव हैं, जो विल्लीवक्कम से जीते हैं।
पांच मई को अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री ओ एस मणियन ने पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी से मुलाकात के बाद कहा कि अन्नाद्रमुक, टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन नहीं देगी।
राज्य में 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही अन्नाद्रमुक ने टीवीके को बाहरी समर्थन देने को लेकर मतभेदों के कारण बुधवार को अपने नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक रद्द कर दी। टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, जिनमें दो सीटें इसके संस्थापक विजय की हैं।
एक सूत्र ने बताया कि सात मई को शपथ ग्रहण की तैयारी कर रहे विजय के आवास पर पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। पार्टी ने अपने निर्वाचित विधायकों को मामल्लापुरम के एक रिसॉर्ट में ठहराया है और साथ ही कांग्रेस व अन्नाद्रमुक से उसकी बातचीत जारी है।
विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतने वाली द्रमुक ने सात मई की शाम को अपने विधायकों की बैठक बुलाई है और पार्टी चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी से जीते युवा इकाई के सचिव उदयनिधि स्टालिन को विधायक दल का नेता चुन सकती है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने स्वीकार किया कि टीवीके प्रमुख विजय ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा है।
उन्होंने कहा, ''कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि तमिलनाडु में मिला जनादेश एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए है, जो संविधान की अक्षरशः रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस भाजपा और उसके समर्थकों को किसी भी तरह से तमिलनाडु की सरकार चलाने की अनुमति नहीं देगी। विजय ने पेरुंथलाइवर कामराज से प्रेरणा लेने की बात भी कही है।''
वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) को चुनावी नतीजों में परिलक्षित राज्य की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए विजय के अनुरोध पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
वहीं, द्रमुक के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कांग्रेस के इस रुख की आलोचना करते हुए कहा कि टीवीके को समर्थन देना ''द्रमुक और तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात'' है।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा ''उन्होंने (कांग्रेस ने) जनता द्वारा दिए गए जनादेश के साथ विश्वासघात किया है। विजय प्रमाण पत्र पर निर्वाचन अधिकारी के हस्ताक्षर की स्याही सूखने से पहले ही उन्होंने इस गठबंधन को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया है।''
उन्होंने पूछा कि सबसे अहम सवाल यह है कि यह ''नासमझी भरा फैसला किसने लिया और इसका कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा?''
सरवनन ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि उन्होंने इस पर गंभीरता से विचार किया होगा। असल मुद्दा भाजपा का विरोध है, जो उनकी वैचारिक शत्रु है। हमने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया है। हमारे नेता एम.के. स्टालिन ने ही राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित किया था, जब भाजपा और आरएसएस उनकी आलोचना कर रहे थे। और अब एक ही दिन में वे टीवीके का समर्थन करने की बात कह रहे हैं। यह तमिलनाडु की जनता का जनादेश नहीं है।''
राजनीतिक विश्लेषक सुमंत रमन ने कहा कि कांग्रेस का द्रमुक से अलग होना राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ होगा और टीवीके के साथ जाना जोखिम भरा कदम हो सकता है।
रमन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''अगर टीवीके और कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पसंद बन जाते हैं, जैसा कि संभव है, तो यह द्रमुक के लिए अस्तित्व का खतरा है। चुनावों में द्रमुक गठबंधन को 12-15 प्रतिशत की बढ़त अल्पसंख्यक वोटों से ही मिली थी। अगर यह बढ़त हाथ से निकल जाती है, तो उनके जीतने की संभावना नाटकीय रूप से कम हो जाएगी।''
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीती हैं, जबकि द्रमुक के अन्य सहयोगी आईयूएमएल, वीसीके, भाकपा, माकपा और डीएमडीके ने स्पष्ट कर दिया है कि वे टीवीके को समर्थन नहीं देंगे।
फिलहाल सरकार बनाने के लिए टीवीके को 118 के साधारण बहुमत तक पहुंचने के वास्ते 11 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
अन्नाद्रमुक के सहयोगी दलों पीएमके और एएमएमके ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। पीएमके के पास चार सीट और एएमएमके के पास एक सीट है।
अन्नाद्रमुक की आईटी इकाई के संस्थापक रहे एस्पायर स्वामीनाथन ने 'एक्स' पर कहा, ''अन्नाद्रमुक के चुनाव परिणाम के बाद का असली ड्रामा पार्टी के बाहर नहीं, बल्कि अंदर ही देखने को मिल सकता है। पश्चिमी और उत्तरी हिस्से से आ रही फुसफुसाहट से संकेत मिलता है कि कोयंबटूर का कोई जानकार और विल्लुपुरम का कोई मुखर नेता जल्द ही वह सवाल पूछ सकता है जिससे हर कोई बच रहा है: क्या पार्टी को नेतृत्व से बचाने का समय आ गया है, इससे पहले कि कार्यकर्ताओं को खुद ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़े? राजनीति में तख्तापलट नारों से शुरू नहीं होते। वे चुप्पी, फोन कॉल और 'समीक्षा बैठकों' से शुरू होते हैं।''
उन्होंने 2021 में अन्नाद्रमुक से इस्तीफा दे दिया था और अब एक स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक के रूप में काम करते हैं।
भाषा गोला मनीषा
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