एअर इंडिया विमान दुर्घटना: विमान की कमान कैप्टन सभरवाल और सह-पायलट क्लाइव कुंदर के पास थी
संतोष पवनेश
- 12 Jul 2025, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
मुंबई, 12 जुलाई (भाषा) एअर इंडिया की उड़ान संख्या 171 के अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त होने से कुछ सेकंड पहले, इसके दोनों इंजनों के ईंधन नियंत्रण स्विच बंद हो गए थे। यह बात शनिवार को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कही गई जोकि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के कॉकपिट में पायलट की एक भयावह गलती की ओर इशारा करती है।
एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एपीएआई) ने रिपोर्ट से असहमति जताते हुए कहा कि जांच "गोपनीयता के आवरण में लिपटी हुई", पायलट के खिलाफ पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है और इसमें जल्दबाजी में निष्कर्ष पर पहुंचा गया है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एआईआईबी) की शनिवार सुबह जारी की गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उड़ान के दौरान स्विच ‘कटऑफ’ स्थिति में कैसे आ गए और न ही दुर्घटना के लिए किसी पर स्पष्ट रूप से दोष तय किया गया है। जांच में वॉयस रिकॉर्डिंग को लेकर पायलट की पहचान भी नहीं की गई है।
विमान का नियंत्रण फर्स्ट आफिसर क्लाइव कुंदर (32) के पास था, जबकि एअर इंडिया में 30 वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी सुमित सभरवाल, उड़ान की निगरानी करने वाले वरिष्ठ कॉकपिट अधिकारी थे।
यहां दोनों पायलट का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है-
कैप्टन सुमित सभरवाल: एअर इंडिया में 30 साल का अनुभव रखने वाले 56-वर्षीय सभरवाल के पास एआई 171 (बोइंग 787 ड्रीमलाइनर) की कमान थी। सभरवाल के पास 8,596 घंटे बोइंग 787 उड़ाने समेत कुल 15,638 घंटे उड़ान भरने का अनुभव था। वह एअर इंडिया के प्रशिक्षक भी थे।
सभरवाल ने हवाई अड्डे से अपने परिवार को फोन किया था, उन्हें आश्वासन दिया था कि वह लंदन में उतरने के बाद उनसे फिर से संपर्क करेंगे।
मुंबई में उनके सहकर्मी और सह-पायलट उन्हें एक सज्जन व्यक्ति के रूप में याद करते थे, जो न केवल अपने उड़ान कौशल के लिए, बल्कि अपने सौम्य स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे।
सह-पायलट क्लाइव कुंदर: 32-वर्षीय कुंदर के पास कुल 3,403 घंटों का उड़ान अनुभव था, जिसमें से 1,128 घंटे उन्होंने ड्रीमलाइनर पर बिताए थे। कुंदर उड़ान संख्या- एआई 171 उड़ा रहे थे, जबकि सभरवाल इसकी निगरानी कर रहे थे।
मुंबई के गोरेगांव निवासी कुंदर ने पायलट बनने के अपने सपने को सफलतापूर्वक पूरा करने से पहले एक साल तक एयरोनॉटिकल इंजीनियर के रूप में काम किया था।
उनके पड़ोसी उन्हें एक नेकदिल और खेलों के शौकीन व्यक्ति के रूप में याद करते हैं, जो इमारत के परिसर में क्रिकेट खेला करते थे।
अहमदाबाद हवाई अड्डे से 12 जून को लंदन के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद बोइंग 787 ड्रीमलाइनर एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से एक को छोड़कर सभी की मौत हो गई थी जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य को भी जान गंवानी पड़ी थी। यह एक दशक की सबसे घातक विमान दुर्घटना थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने भारतीय समयानुसार अपराह्न एक बजकर 38 मिनट 39 सेकंड पर उड़ान भरी और एक बजकर 39 मिनट 05 सेकंड पर एक पायलट ने ‘मे डे- मे डे- मे डे’ संदेश दिया। 'मे-डे' का अभिप्राय आपातकालीन स्थिति में संकट के संदेश से है।
मुंबई के पवई इलाके में स्थित जल वायु विहार आवासीय परिसर में, जहां कैप्टन सभरवाल रहते थे, उनके परिवार के सदस्यों ने मीडियाकर्मियों से बात करने से इनकार कर दिया।
प्रवेश द्वार पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया।
कैप्टन सभरवाल के 92 वर्षीय पिता पुष्करराज सभरवाल को इमारत में प्रवेश करते देखा गया।
उसी परिसर में रहने वाले एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि मीडिया को सभरवाल के वृद्ध पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को परेशान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें कुछ भी पता नहीं है।
उन्होंने पूछा, ‘‘क्या आपको लगता है कि पायलट जानबूझकर अपनी जान दे देंगे?’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो भी जानकारी आपको एकत्र करनी है, अहमदाबाद से एकत्र करनी चाहिए। विमानन कंपनी के मालिक से पूछा जाना चाहिए कि विमान में क्या गड़बड़ी हुई।’’
गोरेगांव के राम मंदिर इलाके में, सह-पायलट क्लाइव कुंदर के परिवार के सदस्य अपने घर पर मौजूद नहीं थे।
भाषा संतोष