न्यायालय ने संभल शाही जामा मस्जिद कुआं विवाद मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
देवेंद्र माधव
- 10 Jan 2025, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह संभल में मुगलकालीन जामा मस्जिद के प्रवेश द्वार के निकट स्थित एक ‘‘निजी’’ कुएं का पुनरुद्धार करने या नमाज पढ़ने की अनुमति देने के मामले में यथास्थिति बनाए रखें।
शाही जामा मस्जिद, संभल की प्रबंधन समिति की याचिका पर विचार करते हुए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक, संभल के जिलाधिकारी और हरि शंकर जैन के नेतृत्व में हिंदू पक्ष से जुड़े व्यक्तियों को नोटिस जारी किए।
मस्जिद समिति ने एक नयी याचिका में कहा कि संभल जिला प्रशासन शहर में पुराने मंदिरों और कुओं का पुनरुद्धार करने के लिए एक ‘‘कथित अभियान’’ चला रहा है। याचिका के मुताबिक खबरों से पता चला है कि कम से कम 32 पुराने अप्रयुक्त मंदिरों को बहाल किया गया है और 19 कुओं को सार्वजनिक उपयोग व प्रार्थना के लिए चिह्नित किया गया है।
याचिका में कहा गया है, “जिला प्रशासन द्वारा बहाल किए जाने वाले कुओं की सूची में मस्जिद परिसर में स्थित एक कुआं भी शामिल है।”
याचिका में संभल के जिलाधिकारी को मस्जिद के प्रवेश द्वार के पास स्थित निजी कुएं को लेकर यथास्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश देने तथा उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बिना भविष्य में कोई भी कार्रवाई न करने देने का अनुरोध किया गया था।
इसमें कहा गया है कि कुआं आंशिक रूप से मस्जिद परिसर के अंदर और आंशिक रूप से बाहर बताया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार तक जाने वाली तीन संकरी गलियों को जोड़ने वाली जगह पर स्थित कुएं के पानी का उपयोग मस्जिद द्वारा किया जा रहा है।
पीठ ने निर्देश दिया कि उसकी अनुमति के बिना कुएं के संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा और अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
प्रबंधन समिति का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कुएं के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘‘अनादि काल से इस कुएं से पानी निकाला जाता रहा है।’’
अहमदी ने एक नोटिस पर चिंता जताई जिसमें इस स्थल को ‘‘हरि मंदिर’ बताया गया है तथा वहां धार्मिक गतिविधियां शुरू करने की योजना बनाई गई है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ऐसी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कृपया वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।’’
पीठ ने कहा कि कुएं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए और इससे संबंधित कोई भी नोटिस प्रभावी नहीं होगा।
हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि कुआं मस्जिद के दायरे से बाहर है और ऐतिहासिक रूप से इसका इस्तेमाल पूजा के लिए किया जाता रहा है।
अहमदी ने कहा कि कुआं आंशिक रूप से मस्जिद परिसर के अंदर और आंशिक रूप से बाहर है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में गूगल मैप की एक तस्वीर का हवाला दिया।
मस्जिद समिति ने कहा कि उसने एक मामले में चंदौसी में दीवानी न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन, संभल के 19 नवंबर, 2024 के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है।
मस्जिद समिति ने कहा कि सर्वेक्षण के लिए याचिका दायर किए जाने के दिन ही वह याचिका मस्जिद का पक्ष सुने बिना स्वीकार कर ली गई।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 29 नवंबर को संभल की एक निचली अदालत को चंदौसी में मस्जिद और उसके सर्वेक्षण से संबंधित मामले की कार्यवाही रोकने का आदेश दिया था, साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को हिंसा प्रभावित शहर में शांति व सद्भाव बनाए रखने का निर्देश दिया था।
पीठ ने निर्देश दिया था कि ‘‘शांति और सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए’’ और राज्य प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के बयान पर गौर किया।
इसने मस्जिद सर्वेक्षण के बाद ‘एडवोकेट कमिश्नर’ की प्रस्तावित रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखने का निर्देश दिया, जब तक कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित अपीलीय अदालत मस्जिद समिति की अपील पर सुनवाई नहीं कर लेती।
उच्चतम न्यायालय ने मस्जिद समिति को इलाहाबाद उच्च न्यायालय या किसी अन्य उचित मंच पर जाने का निर्देश भी दिया।
आदेश में कहा गया कि हिंदू पक्ष की याचिका पर दीवानी न्यायाधीश के समक्ष आठ जनवरी, 2025 को सुनवाई तय की गई है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
भाषा
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