छत्तीसगढ़ में पांच वर्षों में 87 हजार से अधिक लापता लोग बरामद
आशीष
- 08 May 2026, 10:46 PM
- Updated: 10:46 PM
रायपुर, आठ मई (भाषा) छत्तीसगढ़ में पिछले पांच से अधिक वर्षों में लापता 1,03,766 लोगों में से 87,000 को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों तक पहुंचाया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि राज्य में गुमशुदा लोगों की तलाश अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशील पुलिस व्यवस्था और मानवीय जिम्मेदारी की मजबूत पहल बन गयी है। राज्य में वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक कुल 1,03,766 गुम लोगों की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से 87,035 लोगों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों तक पहुंचाया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को राज्य में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए प्रभावी अभियान संचालित करने के निर्देश दिए थे।
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित 'ऑपरेशन तलाश' और 'ऑपरेशन मुस्कान' के जरिए बरामद लोगों में 2,785 बालक, 16,472 बालिकाएं, 18,671 पुरुष और 49,107 महिलाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस लगातार संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ गुमशुदा लोगों की तलाश में सक्रिय है।
उन्होंने बताया कि इन मामलों में अब तक मानव तस्करी जैसे किसी बड़े संगठित अपराध की जानकारी सामने नहीं आई है। बरामद लोगों में अधिकांश ने अपने बयानों में बताया कि वे प्रेम संबंध, रोजगार की तलाश, परिजनों की डांट या घूमने जाने जैसी वजहों से घर छोड़कर चले गए थे। इनमें से कई लोग बाद में खुद वापस लौट भी आए।
अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों की तलाश को तेज गति देने के लिए अप्रैल 2026 में राज्यभर में 'ऑपरेशन तलाश' अभियान चलाया गया। इस अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस को उल्लेखनीय सफलता मिली और केवल एक माह में 4056 गुमशुदा लोगों को खोज निकाला गया। इनमें 545 बच्चे तथा 3511 महिला और पुरुष शामिल रहे।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने अंतर-राज्यीय समन्वय का भी प्रभावी उपयोग किया। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से 182 गुमशुदा लोगों को खोजकर वापस लाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि 'ऑपरेशन तलाश' में जिला पुलिस इकाइयों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। बरामदगी के मामले में दुर्ग जिला सबसे आगे रहा, जहां 683 लोगों का पता लगाया गया।
भाषा संजीव आशीष
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