महाराष्ट्र में नयी सरकार का शपथ ग्रहण पांच दिसंबर को, मुख्यमंत्री पद के लिए फडणवीस सबसे आगे
सुभाष माधव
- 30 Nov 2024, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
मुंबई, 30 नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच दिसंबर को महाराष्ट्र में नयी महायुति सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। राज्य में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस सबसे आगे हैं।
प्रदेश भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में बृहस्पतिवार को शाम पांच बजे होगा।
हालांकि, अभी तक यह घोषणा नहीं की गई है कि मुख्यमंत्री कौन होगा, लेकिन भाजपा सूत्रों ने बताया कि फडणवीस इस शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। वह दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और पूर्ववर्ती एकनाथ शिंदे नीत सरकार में उप मुख्यमंत्री थे।
कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रहे शिंदे इन अटकलों के बीच एक दिन पहले अपने पैतृक गांव चले गए कि नयी सरकार को आकार देने के तौर-तरीकों से वह खुश नहीं हैं।
उनके एक सहयोगी ने बताया कि वह बीमार हैं। उन्होंने बताया कि शिंदे को तेज बुखार है।
बावनकुले ने शनिवार शाम ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि शपथ ग्रहण समारोह पांच दिसंबर 2024 को शाम पांच बजे आजाद मैदान में होगा। प्रधानमंत्री मोदी इस समारोह में शामिल होंगे।
इससे पहले दिन में, पुणे में संवाददाताओं से बात करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख अजित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा से होगा, जबकि दो सहयोगी दलों--उनकी पार्टी राकांपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना से उप मुख्यमंत्री होंगे।
शिंदे के बीमार होने के बारे में बात करते हुए सतारा जिले के रहने वाले शिवसेना नेता शंभुराज देसाई ने पत्रकारों को बताया कि शिंदे और पार्टी के अन्य नेता भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर शुक्रवार तड़के दिल्ली से लौटे, तब से कार्यवाहक मुख्यमंत्री को खांसी और जुकाम की शिकायत है।
देसाई ने कहा, ‘‘उन्हें काफी थकान हो गई थी, इसलिए हमने उन्हें आराम करने की सलाह दी है।’’
शिंदे के करीबी एवं शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा कि उनकी पार्टी को गृह विभाग मिलना चाहिए। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए यह भी दावा किया कि शिंदे को दरकिनार करने की कोशिशें की गईं।
इस बीच, एक भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी के विधायक दल का नेता चुनने के लिए दो दिसंबर को बैठक होगी। उन्होंने कहा कि इस बार फडणवीस को मुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना है।
शिवसेना प्रमुख एवं जून 2022 से मुख्यमंत्री रहे शिंदे ने बृहस्पतिवार रात दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं की बैठक में हिस्सा लिया। इससे पहले, शिंदे ने स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मुख्यमंत्री पद पर कोई भी फैसला उन्हें स्वीकार्य होगा।
शिंदे पर शिवसेना नेताओं के एक समूह का दबाव है, जो मानते हैं कि उन्हें उप मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए, क्योंकि वह दो साल से अधिक समय से मुख्यमंत्री हैं। पार्टी नेताओं का एक और समूह इस बात पर जोर दे रहा है कि उन्हें नयी सरकार का हिस्सा होना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिंदे नीत शिवसेना और अजित पवार नीत राकांपा के महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के साथ सत्ता बरकरार रखी। चुनाव परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए गए थे।
राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 है। चुनाव में भाजपा ने 132 सीट, शिवसेना ने 57 और राकांपा ने 41 सीट हासिल की। लेकिन सरकार गठन में देरी हुई क्योंकि महायुति इस बारे में आम सहमति बनाने में विफल रहा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।
शिंदे, फडणवीस और अजित पवार ने बृहस्पतिवार देर रात भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री शाह से मुलाकात कर सत्ता साझेदारी व्यवस्था पर चर्चा की थी। हालांकि, शिंदे ने शीर्ष पद पर अपना दावा छोड़ दिया है। लेकिन इस बात के संकेत मिले हैं कि गठबंधन में अब भी कुछ मतभेद हैं क्योंकि शुक्रवार को सहयोगी दलों की बैठक स्थगित कर दी गई और शिंदे अपने गांव रवाना हो गए।
अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पहले ही कहा है कि मुख्यमंत्री के रूप में फडणवीस उसे स्वीकार्य हैं।
इस बीच, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत ने संवाददाताओं से कहा कि विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित परिणाम के कारण मुख्यमंत्री के चयन में देरी हो रही और सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेदों के कारण शिंदे को अपने गांव जाना पड़ा।
राज्य में 20 नवंबर को हुए चुनाव में विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) को करारी शिकस्त मिली। एमवीए में शामिल कांग्रेस ने 16, शरद पवार नीत राकांपा (एसपी) ने 10 और उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (उबाठा) ने 20 सीट हासिल की।
शरद पवार सहित एमवीए नेताओं ने सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आढाव के साथ एकजुटता व्यक्त की, जिन्होंने हाल के चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के कथित दुरुपयोग के खिलाफ तीन दिन पहले पुणे में विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
शरद पवार ने आरोप लगाया कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया गया।
भाषा सुभाष