शीर्ष अदालत ने युवा वकील को हिरासत में भेजे जाने के मामले में एससीबीए के प्रस्ताव पर मामला दर्ज किया
माधव
- 08 May 2026, 08:09 PM
- Updated: 08:09 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा एक युवा वकील को प्रक्रियात्मक चूक के लिए कथित तौर पर 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' (एससीबीए) द्वारा पारित एक प्रस्ताव को जनहित याचिका मानते हुए शुक्रवार को मामला दर्ज किया।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई के लिए अंतरिम तौर पर 15 मई की तारीख निर्धारित की गई है।
बार एसोसिएशन ने छह मई को उच्च न्यायालय के आदेश पर हैरानी व्यक्त करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से घटना का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।
एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह के माध्यम से जारी प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि न्यायिक शक्ति का सबसे अच्छा प्रदर्शन भय के बजाय धैर्य के माध्यम से होता है, खासकर उन युवा अधिवक्ताओं के साथ व्यवहार करते समय जो अभी पेशे में नए हैं।
इसमें कहा गया, ''एससीबीए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में 5 मई, 2026 को हुई कथित घटना पर गहरी चिंता और हैरानी व्यक्त करती है, जिसमें न्यायमूर्ति तरलादा राजशेखर राव के समक्ष अदालत की कार्यवाही के दौरान एक युवा वकील को कथित तौर पर 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में लेने का निर्देश दिया गया था।''
एसोसिएशन ने कहा, ''एससीबीए विनम्रतापूर्वक प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) से अनुरोध करती है कि वह इस मामले का उचित संस्थागत संज्ञान लें, संबंधित रिकॉर्ड और कार्यवाही को देखें तथा न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने और बार-बेंच संबंधों को सौहार्दपूर्ण बनाए रखने के हित में उचित समझे जाने वाले सुधारात्मक एवं प्रशासनिक उपायों पर विचार करें।''
प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि न्यायपालिका और वकीलों के बीच संबंध पारस्परिक सम्मान, गरिमा, धैर्य और संस्थागत संतुलन पर आधारित है, तथा वकील अदालत के अधिकारी हैं।
इसमें कहा गया, ''यद्यपि न्यायालयों के अधिकार और गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए, वहीं न्यायिक शक्तियों के प्रयोग में संयम, आनुपातिकता, निष्पक्षता और करुणा का भी समान रूप से प्रतिबिंब होना चाहिए।''
भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) ने भी इस मामले में प्रधान न्यायाधीश के तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
बीसीआई के अनुसार, ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में न्यायमूर्ति राव एक युवा वकील को फटकार लगाते हुए दिखते हैं, जो सुनवाई के दौरान एक विशिष्ट आदेश की प्रति प्रस्तुत करने में असमर्थ था।
औपचारिक अभिवेदन में, बीसीआई ने कहा है कि वकील द्वारा ''बार-बार क्षमा और दया की गुहार लगाए जाने'' तथा शारीरिक पीड़ा का दावा किए जाने के बावजूद, न्यायाधीश पर कोई असर नहीं पड़ा।
न्यायाधीश ने वकील से कथित तौर पर कहा, ''अब तुम्हें सबक मिलेगा''। उन्होंने उसके अनुभव का मजाक उड़ाते हुए रजिस्ट्रार तथा पुलिसकर्मियों को उसे 24 घंटे के लिए हिरासत में लेने का निर्देश दिया।
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने अपने पत्र में कहा कि न्यायाधीश की कार्रवाई में आनुपातिकता और निष्पक्षता का अभाव था।
भाषा
नेत्रपाल माधव
माधव
0805 2009 दिल्ली