सीबीआई ने रेलवे में मेडिकल रिपोर्ट के बदले रिश्वतखोरी के मामले का पर्दाफाश किया
माधव
- 08 May 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) विशाखापत्तनम ने रेलवे के एक डॉक्टर और दो लोको पायलट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि दोनों लोको पायलट ने अपने-अपने कार्यस्थलों पर अनुचित लाभ पाने के लिए अनुकूल मेडिकल रिपोर्ट हासिल करने के बदले डॉक्टर को रिश्वत दी। यह मामला दक्षिण मध्य रेलवे जोन से जुड़ा है।
अधिकारियों ने दावा किया कि यह ''रेलवे जोन में व्याप्त भ्रष्टाचार'' की सिर्फ एक झलक है, जहां कथित तौर पर डॉक्टर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के बदले कर्मचारियों से रिश्वत लेते हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारी इन रिपोर्ट का इस्तेमाल लंबी छुट्टी प्राप्त करने या चिकित्सकीय रूप से श्रेणी से बाहर होने के लिए करते हैं, जिससे वे कठिन 'फील्ड ड्यूटी' से कार्यालय-आधारित भूमिकाओं में स्थानांतरित हो सकते हैं।
प्राथमिकी में कहा गया है कि गुंटूर मंडल के नंदयाल में वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत डॉ. प्रियदर्शनी ने एक व्यक्ति शेख रसूल करीमुल्ला के साथ कथित तौर पर मिलीभगत की, जिसने बीमारी प्रमाण पत्र के बदले दोनों कर्मचारियों से रिश्वत ली। संदेह से बचने के लिए करीमुल्ला ने डॉक्टर के ड्राइवर के खाते में कथित तौर पर पैसे भेजे।
इसमें कहा गया है कि कर्मचारियों में से एक लक्काकुला वेंकट शिव ज्योति, जो लोको पायलट थीं और जिन्हें चिकित्सकीय कारणों से तकनीशियन के पद पर तैनात किया गया, ने नए विभाग में योगदान नहीं किया और बीमारी की छुट्टी पर बनी रहीं।
प्राथमिकी के अनुसार, ज्योति ने बीमारी की छुट्टी को नियमित करने और दोबारा चिकित्सकीय जांच कराने के लिए आवेदन किया था, और डॉ. प्रियदर्शनी ने कथित तौर पर मदद के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी। हालांकि, बातचीत के बाद रकम को घटाकर 75,000 रुपये कर दिया।
एक अन्य मामले में, गुंटूर डिवीजन में लोको पायलट गदिदापति रमेश बाबू पर आरोप है कि वह रनिंग क्रू के रूप में काम करने के लिए चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित होना चाहते थे ताकि उन्हें एक स्थिर नौकरी में स्थानांतरित किया जा सके।
जांच एजेंसी को इस मामले में भी इसी तरह के धन लेन-देन का पता चला। प्राथमिकी के अनुसार, दोनों घटनाएं पिछले साल जून में घटी थीं।
कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे अस्पतालों में इस तरह के भ्रष्ट तौर तरीके व्यापक रूप से अपनाए जाते हैं, जिसके कारण वास्तविक चिकित्सा मामलों को भी अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है।
एक अधिकारी ने कहा, ''रेलवे बोर्ड को इस भ्रष्टाचार को रोकने के तरीकों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल ईमानदार कर्मचारियों को परेशानी होती है बल्कि परिचालन क्षमता भी प्रभावित होती है।''
भाषा आशीष माधव
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0805 2029 दिल्ली