सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापन के लिए कोचिंग संस्थान पर लगाया तीन लाख रुपये का जुर्माना
ॉ योगेश रंजन
- 18 Aug 2024, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए कोचिंग संस्थान 'श्रीराम 'एस आईएएस' पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
भ्रामक विज्ञापन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2022 के संबंध में अपने दावों से संबंधित था।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार सीसीपीए ने 'श्रीराम 'एस आईएएस' पर भ्रामक विज्ञापन के लिए तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के उल्लंघन के मद्देनजर मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के संबंध में भ्रामक विज्ञापन के लिए 'श्रीराम 'एस आईएएस' कोचिंग संस्थान के खिलाफ आदेश जारी किया है।
सीसीपीए ने बताया कि कोचिंग संस्थान और ऑनलाइन एडटेक मंच संभावित उम्मीदवारों (उपभोक्ताओं) को प्रभावित करने के लिए उन्हीं सफल उम्मीदवारों की तस्वीरों और नामों का उपयोग करते हैं, जबकि ऐसे उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम की अवधि का खुलासा नहीं किया जाता है।
सीसीपीए ने विज्ञापन सामग्री का हवाला देते हुए कहा कि 'श्रीराम 'एस आईएएस' ने अपने विज्ञापन में 'यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 200 से अधिक चयन' और भारत का नंबर एक प्रतिष्ठित यूपीएससी/आईएएस कोचिंग संस्थान होने का दावा किया।
सीसीपीए ने कहा, "इससे उपभोक्ताओं को यह लगता है कि संस्थान द्वारा दावा किए गए सभी सफल अभ्यर्थियों ने संस्थान द्वारा वेबसाइट पर विज्ञापित सशुल्क पाठ्यक्रमों का चयन किया था।"
बयान में कहा गया है कि 'श्रीराम 'एस आईएएस' ने अपने जवाब में यूपीएससी सीएसई 2022 में 200 से अधिक चयनों के अपने दावे के मुकाबले केवल 171 सफल उम्मीदवारों का विवरण प्रस्तुत किया।
इन 171 अभ्यर्थियों में से 102 अभ्यर्थी निःशुल्क 'इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी)' से, 55 अभ्यर्थी निःशुल्क टेस्ट सीरीज से, नौ अभ्यर्थी जीएस क्लासरूम कोर्स से तथा पांच अभ्यर्थी निःशुल्क कोचिंग प्रदान करने के लिए राज्य सरकार और संस्थान के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत विभिन्न राज्यों से थे।
सीसीपीए ने कहा, "इस तथ्य का खुलासा उनके विज्ञापन में नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ता धोखा खा रहे हैं।"
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