लंबे समय तक निकट संपर्क में रहने से होता है हंटावायरस का संक्रमण: सौम्या स्वामीनाथन
पवनेश
- 09 May 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि क्रूज जहाज से संबंधित हंटावायरस का मौजूदा प्रकोप ''नियंत्रण किये जाने योग्य'' प्रतीत होता है क्योंकि इस वायरस के प्रसार के लिए लंबे समय तक निकट संपर्क की आवश्यकता होती है, जबकि कोविड 19, खसरा या इन्फ्लूएंजा जैसे अत्यधिक संक्रामक वायरस के मामले में ऐसा नहीं है।
'पीटीआई वीडियो' से बात करते हुए, स्वामीनाथन ने कहा कि वायरस की लंबी 'इनक्यूबेशन' अवधि - जो छह से आठ सप्ताह होने का अनुमान है - यह बताती है कि क्रूज जहाज पर पहला मामला जहाज के अप्रैल की शुरुआत में रवाना होने के लगभग एक महीने बाद क्यों सामने आया।
उन्होंने कहा, ''इस वायरस की 'इनक्यूबेशन' अवधि काफी लंबी है, और यही कारण है कि जहाज पर पहले व्यक्ति को इससे संक्रमित होने में लगभग एक महीना लग गया।''
यह मानते हुए कि जहाज 2-3 अप्रैल को रवाना हुआ था और पहली महिला अप्रैल के अंत में बीमार पड़ी, उन्होंने कहा कि यह अवधि छह से आठ सप्ताह की है और इसलिए, एहतियात के तौर पर, ''इन लोगों को तब तक पृथक रखना होगा।''
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक ने कहा कि सबसे सही रणनीति यह होगी कि जहाज पर सवार सभी लोगों या संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क में आए लोगों को 'इनक्यूबेशन' अवधि के दौरान पृथक रखा जाए, हालांकि कुछ देश केवल रोग के लक्षण वाले लोगों को पृथक करने का विकल्प चुन सकते हैं।
उन्होंने कहा, ''कुछ देश कह सकते हैं कि लक्षण दिखने पर ही पृथक-वास में रहें, लेकिन कई देश लोगों से इन्क्यूबेशन अवधि खत्म होने तक स्व-पृथक वास में रहने को कह रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि पृथक रहने के दौरान लक्षण दिखने पर तुरंत हंटावायरस संक्रमण की जांच करानी चाहिए और पृथकवास के नियमों का सख्ती से पालन करने से संक्रमण को फैलने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
स्वामीनाथन ने कहा, ''असल में, अगर आप इनक्यूबेशन अवधि समाप्त होने तक ऐसा करते हैं, तो संक्रमण फैलने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होगी।''
संक्रमण की पद्धति को समझाते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि मौजूदा स्ट्रेन संभवतः एकमात्र ज्ञात हंटावायरस है जो एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में फैल सकता है और अब तक इसका संक्रमण लंबे समय तक निकट शारीरिक संपर्क से जुड़ा हुआ है।
स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया कि इस वायरस को यौन संबंधों के जरिये होने वाले संक्रमण के प्रसार की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
उन्होंने कहा, ''हालांकि, यह वायरस विभिन्न जैविक नमूनों में पाया गया है। इसलिए यह संभवतः लार, रक्त और शायद वीर्य में भी मौजूद हो सकता है।''
स्वामीनाथन ने यह भी कहा कि वायरस के वायु में फैलने की ''काफी संभावना'' है क्योंकि हंटावायरस श्वसन संक्रमण और निमोनिया का कारण बनता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह वायरस अन्य वायुजनित संक्रमणों की तुलना में काफी कम संक्रामक है और सामान्य संपर्क से नहीं फैलता है।
कोविड-19 महामारी से तुलना करते हुए, स्वामीनाथन ने कहा कि बिना लक्षण वाले संक्रमण तेजी से नहीं फैलने के कारण रोकथाम अपेक्षाकृत अधिक संभव हो पाती है।
भाषा सुभाष पवनेश
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