जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों की तलाश में सुरक्षा बलों की मदद कर रहे वीडीजी
आशीष माधव
- 17 Jul 2024, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
(अंकुर सेठी)
डोडा (जम्मू-कश्मीर), 17 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के देसा जंगल में .303 राइफल से लैस कई ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) सोमवार रात चार सैनिकों की जान लेने वाले आतंकियों की तलाश में सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं।
वीडीजी ने संकल्प लिया है कि वे आतंकवादियों को क्षेत्र से भागने नहीं देंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारी हथियारों से लैस आतंकियों का मुकाबला करने के लिए उनके पुराने हथियारों को अधिक परिष्कृत स्वचालित राइफल से बदला जाना चाहिए।
पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े आतंकियों की तलाश के लिए गाई और बांदा क्षेत्रों में गश्त कर रहे वीडीजी समूह के सदस्य सुदर्शन सिंह ने कहा, ‘‘हम 14 घंटे से सोए नहीं हैं।’’
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वे (सोमवार रात देसा जंगल में गोलीबारी के घटनास्थल से) भाग निकले, लेकिन वे कब तक भागते रहेंगे, वे मारे जाएंगे क्योंकि हम उन्हें भागने नहीं देंगे।’’
दस-पंद्रह सदस्यों वाले इन समूहों को पहले ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) के रूप में जाना जाता था, जिनका गठन जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी खतरों के मद्देनजर ग्रामीणों को आत्मरक्षा क्षमताएं प्रदान करने के लिए 1995 में किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार रात पौने ग्यारह बजे से बुधवार देर रात दो बजे के बीच देसा वन क्षेत्र में कलां भाटा और पंचन भाटा के पास सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। उन्होंने बताया कि संदिग्ध गतिविधि देखने पर वीडीजी ने भी गोलीबारी की, जबकि गंडोह क्षेत्र से दो गोले बरामद किए गए।
सुदर्शन सिंह ने कहा कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से आतंकियों की आवाजाही के बारे में सूचना मिल रही थी, लेकिन वे उनके स्थान का पता नहीं लगा सके। सोमवार की रात को आतंकियों ने एक तलाशी दल पर गोलीबारी की, जिसमें एक कैप्टन सहित चार सैनिक मारे गए, जो केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू क्षेत्र में तीन सप्ताह में तीसरी बड़ी आतंकी घटना थी।
वीडीजी के एक अन्य सदस्य संजय सिंह ने कहा, ‘‘आतंकी भाग रहे हैं, हम उन्हें इस क्षेत्र से जिंदा नहीं जाने देंगे।’’ उन्होंने कहा कि वीडीजी स्वचालित हथियारों के साथ या बिना स्वचालित हथियारों के आतंकवादियों से लड़ना जारी रखेंगे।
सुदर्शन सिंह ने कहा कि .303 राइफल स्वचालित हथियार के सामने कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हम क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति जानते हैं। आतंकी अमेरिका निर्मित एम4 कार्बाइन जैसे सबसे परिष्कृत हथियारों से लैस हैं। उनका मुकाबला करने के लिए हमें स्वचालित हथियारों की आवश्यकता है।’’
सुदर्शन सिंह ने कहा, ‘‘सरकार को हमारे (वीडीजी) लिए उचित नीति बनानी चाहिए। हम चाहते हैं कि पूर्व सैनिक, चाहे वे सेना, पुलिस या अर्द्धसैन्य बलों से हों, हमारे समूहों का नेतृत्व करें।’’
वर्ष 2022 में, वीडीसी के लिए नीति को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संशोधित किया गया और वीडीजी को शुरू किया गया। वीडीसी का नेतृत्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) करते थे।
वीडीसी योजना में केवल एसपीओ को भुगतान किया जाता था लेकिन 2022 के बाद, वीडीजी के सभी सदस्यों को सरकार द्वारा वित्तीय मुआवजा दिया जा रहा है।
गृह मंत्रालय की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में कुल 4,153 वीडीजी और 32,355 एसपीओ जिला पुलिस अधीक्षकों या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों की प्रत्यक्ष निगरानी में नागरिकों की सुरक्षा और आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
भाषा आशीष