उच्च न्यायालय ने चार भारतीय मिशन में कांसुलर, वीजा सेवाओं के लिए निविदा प्रक्रिया रद्द की
सुरेश
- 15 Jul 2026, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा स्थित भारतीय मिशन में वाणिज्य दूतावास, पासपोर्ट और वीजा सेवाओं की 'आउटसोर्सिंग' के संबंध में केंद्र सरकार की तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को बुधवार को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैन जैन की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह चारों भारतीय मिशन में इन सेवाओं को मुहैया कराने के संबंध में एक महीने के भीतर नए अनुरोध प्रस्ताव जारी करे और चयन प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करे।
पीठ ने कहा कि इस बीच, मौजूदा सेवा प्रदाताओं को सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी जाए, ताकि सार्वजनिक सेवाओं में कोई बाधा न आए और आम लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अदालत ने यह फैसला निविदा में असफल रहीं ई ट्रैव टेक लिमिटेड और एम/एस वेरासिस लिमिटेड की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनाया।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ताओं को जिन मानकों पर अंक दिया गया, वह ''मनमाना, अतार्किक'' था और इसमें पारदर्शिता का अभाव था, जिसके कारण तकनीकी मूल्यांकन संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर टिक नहीं सकता।
अदालत ने कहा, ''इन याचिकाओं को स्वीकार किया जाता है। संबंधित तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है।''
पीठ ने कुछ निजी कंपनियों के पक्ष में निविदा दिए जाने की प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि अंक किस आधार पर दिए गए। पीठ ने कहा कि मूल्यांकन पत्र में न तो याचिकाकर्ताओं के प्रस्तावों की कमियों का उल्लेख किया गया और न ही यह बताया गया कि तुलनात्मक मानदंडों के तहत उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक देने के लिए कौन-से तुलनात्मक मानक अपनाए गए।
अदालत ने अधिकारियों के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि तकनीकी मूल्यांकन समितियों के समक्ष मौखिक प्रस्तुतियों के दौरान कमियों के बारे में बताया गया था। अदालत ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि ऐसी प्रस्तुतियां मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा थीं, तब भी वे लिखित रूप से दर्ज कारणों का विकल्प नहीं हो सकतीं।
भाषा आशीष सुरेश
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