पद उपलब्ध होने पर ही दैनिक वेतन भोगी कर्मी को नियमित किया जा सकता है : दिल्ली उच्च न्यायालय
नरेश
- 14 Jul 2026, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक सरकारी संस्था में सहायक विक्रेता के पद पर नियमित करने की याचिका खारिज करने के औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए टिप्पणी की कि दैनिक वेतन भोगी कर्मी को तभी विनियमित किया जा सकता है जब सृजित पद रिक्त हों।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने तेलंगाना स्टेट हैंडलूम वीवर्स हाउसिंग सोसाइटी कोऑपरेटिव लिमिटेड में दैनिक वेतन भोगी कर्मी द्वारा दाखिल उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें न्यायाधिकरण की ओर से उसके खिलाफ 2024 में दिये गए फैसले को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने 1985 में नौकरी शुरू की थी और न्यायाधिकरण में दाखिल याचिका में उसे सहायक विक्रेता के पद पर नियुक्त करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। उसने दलील दी थी कि वह दैनिक वेतन भोगी कर्मी के तौर पर काम नहीं कर रहा था, बल्कि सहायक विक्रेता जैसे पद के लिए निर्धारित कर्तव्य निर्वहन कर रहा था।
प्रबंधन ने अधिवक्ता रावी बीरबल के जरिये याचिका का विरोध किया और दलील दी कि सहायक विक्रेता का कोई पद खाली नहीं था और याचिकाकर्ता के काम का स्वरूप काफी अलग था।
न्यायमूर्ति महाजन ने आठ जुलाई को दिए गए फैसले में न्यायाधिकरण के निर्णय को बरकरार रखा और कहा, ''ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी दैनिक भोगी कर्मी को तभी स्थायी तौर पर रखा जा सकता है, जब विधिवत सृजित पद रिक्त हो।''
अदालत ने टिप्पणी की कि सहायक विक्रेता का कोई पद रिक्त नहीं था और याचिकाकर्ता भी वहां केवल ' सहायक' के तौर पर काम कर रहा था।
अदालत ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता के रोजमर्रा के कामों में 'सफ़ाई', काउंटर साफ़ करना और बैंक व डाकघर के काम निपटाना था जबकि सहायक विक्रेता की जिम्मेदारी लेखा समेत पूरे परिचालन को संभालने की है।
याचिकाकर्ता 1985 में तेलंगाना स्टेट हैंडलूम वीवर्स हाउसिंग सोसाइटी कोऑपरेटिव लिमिटेड में दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर शामिल हुआ था और 1987 में उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।
श्रमिक अदालत ने1995 में उसे बहाल कर दिया। इसके बाद, याचिकाकर्ता ने अपनी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से सहायक विक्रेता के तौर पर नियमित किए जाने की मांग की।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
1407 1821 दिल्ली