राम मंदिर चढ़ावा गिनती में नकदी छिपाने की कई घटनाएं सामने आईं : एसआईटी
चंदन, जफर रवि कांत
- 06 Jul 2026, 11:32 PM
- Updated: 11:32 PM
अयोध्या, छह जुलाई (भाषा) राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा कई बार नकदी छिपाने के कथित मामले सामने आए हैं।
एसआईटी ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर संकेत किया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट न्यासियों के समक्ष पढ़ी गई, लेकिन उस पर कोई चर्चा या बहस नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी की जांच अभी जारी है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से पांच जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज में कई अवसरों पर कर्मचारियों को गिनती कक्ष के भीतर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया। रिपोर्ट में ऐसी लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
एसआईटी के अनुसार ये कथित अनियमितताएं अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक अपनाई गई एक सुनियोजित और बार-बार दोहराई जाने वाली प्रक्रिया प्रतीत होती हैं।
जांच दल ने पाया कि गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी, उनके निजी सामान पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था, कई दानपात्रों की नकदी एक साथ गिनी जाती थी तथा मूल्यवान चढ़ावे के अभिलेखीकरण और सत्यापन में गंभीर कमियां थीं।
रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा का नाम लेते हुए कहा गया है कि प्रथम दृष्टया इनकी संलिप्तता सामने आई है।
इन सभी आरोपियों सहित कुल आठ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच शुरू होने से पहले कुछ कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
रिपोर्ट में चार जून को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपये बरामद होने का भी उल्लेख किया गया है।
एसआईटी ने कहा कि संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेनदेन पाए गए हैं, जिसके मद्देनजर विस्तृत वित्तीय जांच की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन, कर्मचारियों की तलाशी तथा पर्यवेक्षण में गंभीर कमियों के कारण कथित चोरी और गबन संभव हो पाया।
हालांकि, एसआईटी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों और अन्य मूल्यवान चढ़ावे के गायब होने संबंधी आरोपों की प्रारंभिक जांच में पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उसने मूल्यवान चढ़ावे के प्रबंधन, दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जून को एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट की प्रति ट्रस्ट को भेजते हुए उसे जांच के निष्कर्षों से अवगत कराया था। यह रिपोर्ट सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति के साथ संलग्न की गई, जिसमें विवाद के बीच ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह रिपोर्ट सामने आई है।
इससे पहले सोमवार को ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और जांच अभी जारी रहेगी। उन्होंने आभूषणों तथा अन्य मूल्यवान चढ़ावे के गायब होने संबंधी आरोपों को निराधार बताया।
उन्होंने मीडिया के समक्ष आभूषण और अन्य मूल्यवान चढ़ावे भी प्रदर्शित किए और कहा कि इन्हें ट्रस्ट ने सुरक्षित रखा है।
एसआईटी ने स्पष्ट किया कि उसकी यह रिपोर्ट प्रारंभिक है और विस्तृत जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जुलाई को एसआईटी के कार्यकाल में 15 दिन का विस्तार किया था। राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था।
भाषा
चंदन, जफर रवि कांत
0607 2332 अयोध्या