केन-बेतवा लिंक परियोजना: मप्र में प्रभावित ग्रामीणों ने फिर शुरू किया विरोध प्रदर्शन
सुभाष
- 07 Jul 2026, 12:25 AM
- Updated: 12:25 AM
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित आदिवासी महिलाओं और किसानों ने मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के एक गांव में केन नदी की सहायक बराना नदी के किनारे अपना 'चिता आंदोलन' फिर से शुरू कर दिया है।
जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को अप्रैल में अधिकारियों द्वारा प्रभावित लोगों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद स्थगित कर दिया गया था।
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, ''अप्रैल 2026 में अधिकारियों के आश्वासन पर 'चिता आंदोलन' स्थगित किया गया था, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर कार्रवाई करने के बजाय आंदोलन के नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। जमानत मिलने के बाद 250 से अधिक लोगों के खिलाफ और झूठे मामले दर्ज किए गए।''
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित गांवों में कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए ग्राम सभाएं नहीं कराई गईं।
उन्होंने कहा कि प्रभावित समुदायों से उनकी सहमति नहीं ली गई और सामाजिक प्रभाव आकलन की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।
भटनागर ने कहा, ''बुंदेलखंड के लोग किसी तरह की खैरात नहीं मांग रहे हैं। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि सरकार अपने ही बनाए कानूनों का पालन करे।''
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिसंबर 2024 में इसकी शुरुआत की थी। इस परियोजना का उद्देश्य यमुना की सहायक नदियों केन और बेतवा को जोड़कर मध्यप्रदेश के नौ और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में फैले सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराना है।
केंद्र सरकार के अनुसार, इस परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि (मध्य प्रदेश में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 2.51 लाख हेक्टेयर) की सिंचाई होगी, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा तथा 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।
सरकारी अनुमान के अनुसार, परियोजना के कारण 6,600 परिवारों का विस्थापन होगा और करीब 45 लाख पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी।
परियोजना के तहत पन्ना राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के भीतर केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा। वर्ष 2009 में इस अभयारण्य से बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, लेकिन अगले एक दशक में उनका पुनर्वास किया गया।
अरावली विरासत जन अभियान की सह-संस्थापक नीलम आहलूवालिया ने एक बयान में कहा, ''दौधन बांध के कारण 9,000 हेक्टेयर से अधिक प्राकृतिक वन क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा, जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के 5,803 हेक्टेयर वन भी शामिल हैं। यह कोई बंजर भूमि नहीं, बल्कि ऐसा जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां बाघ, घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, गिद्ध, चिंकारा, भेड़िए और दुर्लभ महासीर मछलियां पाई जाती हैं।''
आहलूवालिया ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने इस धारणा पर सवाल उठाया है कि केन नदी में 'अधिशेष' (सरप्लस) जल उपलब्ध है। उनके अनुसार, समिति ने यह भी कहा है कि यह परियोजना पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं होगी।
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