'संदेशे आते हैं': गोवा मूल के ऑस्ट्रेलियाई गायक ने 'मातृभूमि' भारत में दी प्रस्तुति
धीरज
- 15 Feb 2026, 06:53 PM
- Updated: 06:53 PM
(कुणाल दत्त)
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) गोवा में जन्मे ऑस्ट्रेलियाई गायक रूबेन डी मेलो ने करीब दो दशक पहले भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। उन्होंने संगीत में करियर बनाने के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी छोड़ दी थी।
मेलो ने काफी संघर्ष के बाद रचनात्मक क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
पर्थ शहर में रहने वाले गायक एवं गीतकार ने 2024 में गायन प्रतियोगिता 'द वॉइस ऑस्ट्रेलिया' का खिताब भी जीता था।
यहां ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग में आयोजित 'गिग ऑन द ग्रीन' में शुक्रवार की रात को डी मेलो और ऑस्ट्रेलिया में जन्मीं भारतीय मूल की संगीतकार मिलान रिंग ने प्रस्तुति दी।
इस कार्यक्रम में शामिल हुए ऑस्ट्रेलियाई राजदूत फिलिप ग्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन संस्कृति और कला को भारत में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''हम ऑस्ट्रेलिया में भारत की संस्कृति और कला का स्वागत करते हैं।''
ऑस्ट्रेलियाई राजदूत फिलिप ग्रीन ने कार्यक्रम से इतर 'पीटीआई-भाषा' से कहा, '' ऑस्ट्रेलिया में अब 10 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग हैं। यह हमारे देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला समुदाय है, और वे हमारे समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। हम चाहते हैं कि वे द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी बेहतरीन काम करें।''
ग्रीन ने दोनों संगीतकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में कला और संस्कृति के क्षेत्र में वास्तव में सफलता हासिल करने वाले भारतीय मूल के लोगों का यह विशेष पहलू "बहुत खास" है।
इस कार्यक्रम के बाद डी मेलो और रिंग ने अलग-अलग 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत की और रचनात्मक क्षेत्र में अपने सफर के बारे में बताया।
डी मेलो ने कहा, '' मैं लगभग 11 साल की उम्र में पर्थ चला गया था। मैं पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में रहता हूं। फिर, मैंने 2024 में 'द वॉइस ऑस्ट्रेलिया' जीता, और अब मैं वापस भारत, अपनी मातृभूमि लौट आया हूं।''
ऑस्ट्रेलियाई लोक गायक ने कहा कि हालांकि "पर्थ मेरा घर है", लेकिन वह गोवा में बिताए अपने बचपन की यादों को, खासकर अपनी दादी के घर और अपने पैतृक घर की यादों को हमेशा अपने साथ संजोकर रखेंगे।
रिंग ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, '' भारत आना मेरी जीवन भर की ख्वाहिशों की सूची में सबसे ऊपर था, और आखिरकार मैं यहां हूं। मुझे यकीन नहीं हो रहा, यह सब कुछ अवास्तविक सा लग रहा है।''
संगीतकार ने बताया कि उनकी मिश्रित विरासत है, जिसमें उनकी मां की तरफ से भारतीय विरासत भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि उनके नाना का जन्म उत्तर भारत में हुआ था, जबकि उनके पिता हांगकांग से हैं।
पिछले कुछ वर्षों से जर्मनी के बर्लिन में रह रहीं रिंग ने कहा कि प्रत्येक देश और उसकी सड़कों या अन्य जगहों पर सुनाई देने वाली प्राकृतिक ध्वनियां अलग-अलग महसूस होती हैं।
रिंग ने कहा, '' मैं दिल्ली में संगीत कार्यक्रमों में जाना और सितार या तबला वादन सुनना चाहूंगी।''
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धीरज
1502 1853 दिल्ली