अगले दशक के लिए हमारी शीर्ष प्राथमिकताओं में संरचनात्मक सुधार, नवाचार प्रोत्साहन शामिल : मोदी
प्रेम
- 15 Feb 2026, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार की 'सुधार एक्सप्रेस' से आम लोगों को बड़ा फायदा होने का जिक्र करते हुए रविवार को कहा कि अगले दशक के लिए उनकी शीर्ष तीन सुधार प्राथमिकताएं लगातार संरचनात्मक सुधार, नवाचार को प्रोत्साहन और शासन को अधिक सुगम बनाना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 'पीटीआई-भाषा' के साथ एक साक्षात्कार में सुधारों के मोर्चे पर हुई प्रगति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि स्वभाव से वह कभी संतुष्ट नहीं होते हैं क्योंकि उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में कुछ रचनात्मक करने के लिए बेचैनी, ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने और बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है।
उन्होंने अगले दशक के लिए तीन आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता देने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''हमारी दिशा साफ है, हम इसे किसी एक संख्या तक सीमित नहीं रखना चाहते।"
उन्होंने इसको रेखांकित करते हुए कहा, ''पहला, हम संरचनात्मक सुधारों को जारी रखेंगे जो प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता को बेहतर करेंगे। दूसरा, हम प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवाओं में नवोन्मेष को और बढ़ाएंगे।''
उन्होंने कहा, ''तीसरा, हम शासन को और आसान बनाएंगे ताकि नागरिक और कारोबार क्षेत्र ज्यादा आसानी और भरोसे के साथ काम कर सकें।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों से आम नागरिक को मदद मिली है, बिचौलियों का खतरा कम हुआ है और बुनियादी ढांचे के विस्तार से संपर्क बेहतर हुआ है और लॉजिस्टिक गतिविधियों की लागत कम हुई है।
उन्होंने कहा, ''अक्सर, 'सुधार' शब्द को सिर्फ अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिए ही समझा जाता है। लेकिन सामाजिक क्षेत्र में भी सुधार उतने ही जरूरी हैं।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉक जैसे कार्यक्रमों ने उन क्षेत्रों में जिंदगी बदल दी है जिन्हें कभी पिछड़ा मानकर नजरअंदाज किया जाता था। इसी तरह, पीएम जनमन योजना उन आदिवासी समुदायों की पहचान करती है जो खास तौर पर पिछड़े हुए हैं और उनकी भलाई के लिए काम करती है।''
'सुधार एक्सप्रेस' से हुई तरक्की पर उन्होंने कहा, ''मुझे कहना होगा कि स्वभाव से मैं कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। मेरा मानना है कि सार्वजनिक जीवन में और ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने, बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है। हां, हमारे लोगों के लिए और ज्यादा हासिल करने और अपने देश को आगे ले जाने की हमेशा एक मजबूत इच्छा होती है।''
मोदी ने कहा कि ''सुधार एक्सप्रेस' के सफर में पैमाने के स्तर पर हुई प्रगति को भी ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''सुधार इस सरकार की प्रतिबद्धता है, जिसे हमने पूरी तरह से दिखाया है। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हम धीरे-धीरे होने वाले बदलावों से प्रणाली में परिवर्तन की ओर बढ़ गए हैं।''
उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में दो-स्लैब के कर ढांचे से घरों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) और श्रम-गहन क्षेत्रों का बोझ कम हुआ है।
उन्होंने कहा, ''हमने छोटी कंपनियों की परिभाषा बदल दी है, जिससे अनुपालन लागत कम करने में मदद मिली है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सुधार, जिससे बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति मिली है, उससे लोगों, खासकर मध्यम वर्ग को बेहतर विकल्प मिले हैं।''
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि कई पुराने कानून अब इतिहास बन गए हैं।
उन्होंने कहा, ''पहले कौशल विकास, मत्स्य पालन, सहकारिता और आयुष जैसे जरूरी क्षेत्रों पर केंद्रित कोई मंत्रालय नहीं थे। हमने इसे बदल दिया है और अब ये सभी क्षेत्र फल-फूल रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''दशकों से, देश श्रम सुधारों का इंतजार कर रहा था। हमारी सरकार ने ही उन्हें शुरू किया, यह पक्का किया कि कामगारों के हितों की रक्षा हो और कारोबार आगे बढ़ें।''
मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया में डिजिटल क्षेत्र में अगुवा है और यह देश के लोगों के यूपीआई मंच के जरिये लेनदेन करने के तरीके में एक बड़े सुधार से मुमकिन हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमारे युवाओं के लिए, सुधारों ने एक ऐसा परिवेश बनाया है जहां आकांक्षा को समर्थन मिलता है। भारत दुनिया का प्रमुख स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा, ''आज के युवा नवोन्मेषक पहले के मुकाबले बहुत कम मुश्किलों के साथ विचारों को उद्यम के रूप में बदल सकते हैं।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ एमएसएमई के लिए सुधारों से ऋण तक पहुंच बेहतर हुई है, कर प्रक्रिया आसान हुई है और वैश्विक मूल्य शृंखला में एकीकरण मजबूत हुआ है।
भाषा अजय अजय प्रेम
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