संप्रग सरकार के कुप्रबंधन के कारण व्यापार वार्ताएं कभी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकीं:प्रधानमंत्री मोदी
दिलीप
- 15 Feb 2026, 10:17 PM
- Updated: 10:17 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि संप्रग सरकार के "आर्थिक कुप्रबंधन" के कारण भारत व्यापार वार्ताओं में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका और एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।
'पीटीआई-भाषा' के साथ विशेष साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "इन व्यापार समझौतों पर भले ही हाल ही में मुहर लगी हो, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। ये आज की दुनिया में पाए जाने वाले दुर्लभ गुण हैं। हाल के वर्षों में भारत की ओर से किए गए व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि हम एक दशक पहले कहां खड़े थे।"
उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने अपने शासनकाल में कुछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा "अनिश्चितता और अस्थिरता" से भरी रही।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "मुख्यतः उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती। अंत में लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।"
उन्होंने कहा, "लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, हमारे आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई।"
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को नयी दिल्ली के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में फायदा दिखा।
मोदी ने लिखित साक्षात्कार में कहा, "पिछली सरकार के रुख और हमारे दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझने के लिए यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते पर गौर करें। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी इस पर चर्चा और बातचीत हुई थी। लेकिन अंततः हमारी सरकार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौते पर मुहर लगी।"
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है।
उन्होंने कहा, "हमारे अब 38 साझेदार देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हैं, जो भारत के व्यापार इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। इन व्यापार समझौतों की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि ये विभिन्न महाद्वीपों तक फैले हुए हैं और इनमें अलग-अलग आर्थिक शक्ति वाले देश शामिल हैं। इससे हमारे निर्माताओं और उत्पादकों को कई बाजारों में हमारे उत्पादों को बेचने के लिए पर्याप्त विविधता और अवसर मिलते हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन मुक्त व्यापार समझौतों ने भारत में निर्मित उत्पादों के लिए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बाजार खोल दिए हैं। उन्होंने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का उदाहरण दिया, जिनके तहत इन क्षेत्रों में भारत के 99 फीसदी निर्यात पर टैरिफ समाप्त हो जाएगा।
मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद से दोनों देशों के साथ माल व्यापार दोगुना हो गया है।
उन्होंने कहा, "हमारे सेवा क्षेत्र और उससे जुड़े पेशेवरों का विश्व स्तर पर लोहा माना जाता है। उन्होंने पहले ही भारत को विभिन्न क्षेत्रों में 'वैश्विक प्रतिभा केंद्र' के रूप में स्थापित कर दिया है। ये व्यापार समझौते नियामकीय स्थिरता, पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचों और सहयोगी देशों में परिवहन संबंधी सुगमता के साथ उनके लिए अवसरों को और बढ़ावा देते हैं।"
मोदी ने कहा कि देश का विनिर्माण क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से लगातार "बड़ी छलांग" लगा रहा है और ये व्यापार समझौते वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में और अधिक मजबूत उपस्थिति दर्ज करने में भारत और भारतीय उत्पादों की मदद करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इन समझौतों से भारतीय उत्पादकों और निर्माताओं को बेहतर लाभ हासिल होगा, साथ ही हमारे लोगों के लिए अधिक समृद्धि सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में हस्ताक्षरित व्यापार समझौते हमारे विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक और उपयुक्त समय पर हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "ये समझौते हमारे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर अवसर पैदा कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हमारे उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता के मद्देनजर हमारे युवा दुनिया पर गहरा प्रभाव डालेंगे।"
मोदी ने कहा कि एक बार जब भारतीय युवा सहयोगी देशों के आम लोगों के मन पर प्रभाव डाल देंगे, तो फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने कहा, "ये व्यापार समझौते न केवल टैरिफ में कमी के कारण, बल्कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आपूर्ति शृंखलाओं में जगह दिलाने और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। ये समझौते विनिर्माण टैरिफ में धीरे-धीरे कमी लाते हैं, सेवाओं की उपस्थिति बढ़ाते हैं और कपड़ा, जूते तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान निर्यात के लिए नये रास्ते तैयार करते हैं।"
मोदी ने कहा कि इस लिहाज से ये समझौते केवल व्यापार संबंधी आंकड़ों में वृद्धि नहीं करते, बल्कि ढांचागत बदलावों का भी समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा, "ये एफटीए घरेलू सुधारों को बाहरी प्रतिबद्धताओं से भी जोड़ते हैं। इनसे निर्यात के अवसर बढ़ते हैं, प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले टैरिफ संबंधी नुकसान कम होते हैं और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारतीय कंपनियों की उपस्थिति को बढ़ावा मिलता है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ये समझौते एक अधिक खुली, आत्मविश्वास से भरपूर और वैश्विक स्तर पर सक्रिय अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने में भारत की मदद करते हैं, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।"
यह पूछे जाने पर कि हाल में हुए व्यापार समझौतों में एमएसएमई को प्रमुख जगह मिली है, मोदी ने कहा, "हम इन ऐतिहासिक व्यापार समझौतों में मजबूत स्थिति में प्रवेश कर रहे हैं। 'मेड इन इंडिया' की परिकल्पना ने हमारे एमएसएमई में नये आत्मविश्वास और जोश का संचार किया है।"
भाषा पारुल दिलीप
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