युवा हमारी जनसांख्यिकीय ताकत, उन्हें सही दिशा मिले तो लाभ होगा वरना समाज पर बोझ बन सकते हैं : भागवत
रंजन
- 15 Aug 2026, 11:58 AM
- Updated: 11:58 AM
नागपुर, 15 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि युवा देश की जनसांख्यिकीय ताकत हैं और यदि उन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो राष्ट्र को इससे बहुत लाभ होगा वरना वे भविष्य में समाज पर बोझ बन सकते हैं।
भागवत ने 'जेन-जी' के साथ एक सप्ताह के भीतर अपने दूसरे संवाद में यह भी कहा कि आज के युवा 30 साल बाद बूढ़े हो जाएंगे और उन्हें सुझाव दिया कि वे केवल अपने बारे में न सोचें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों का भी ध्यान रखें।
उन्होंने कहा, ''युवा हमारी जनसांख्यिकीय ताकत हैं। यदि उनका सही ढंग से मार्गदर्शन किया जाए तो हमें इससे बहुत लाभ होगा, अन्यथा भविष्य में वे समाज पर बोझ बन सकते हैं। युवा ही कमाने वाले होंगे। रोजगार का मतलब केवल नौकरी नहीं है, बल्कि मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग भी इसमें शामिल हैं और उनकी मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि भारत का दायित्व है कि अपने नजरिये से दुनिया को भविष्य का रास्ता दिखाए और उसे संतुलन हासिल करने में मदद करे। उन्होंने कहा कि देश को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप सोच विकसित करनी होगी।
भागवत ने कहा, ''दुनिया अपने अधूरे नजरिये के कारण लड़खड़ा रही है। भारत का हिस्सा होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम अपने नजरिये से दुनिया को भविष्य का रास्ता दिखाएं और उसमें संतुलन लाएं। हमें इसके लिए खुद को तैयार करना होगा।''
सरसंघचालक ने कार्यक्रम में फहराए गए 200 फुट ऊंचे तिरंगे का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को सोचना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज क्या दर्शाता है और भारत को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने के लिए कितनी मेहनत करनी होगी।
उन्होंने कहा, ''यह हमारा दायित्व है। हमें दूसरों के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए।''
भागवत ने कहा कि देश के युवाओं को सबसे पहले यह समझना होगा कि भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन और न्यूजीलैंड जैसे देशों से अलग है और उसे विकास तथा प्रगति के अपने मानदंड खुद तय करने चाहिए।
उन्होंने कहा, ''हम भारत हैं और हमारी अपनी प्रतिष्ठा, गरिमा और सर्वोच्च सम्मान है। हम किस तरह का विकास चाहते हैं और प्रगति का हमारा मानदंड क्या होगा, इसके बारे में हमें अपने और देश के हित को ध्यान में रखते हुए खुद सोचना होगा।''
उन्होंने कहा कि दुनिया के बाकी हिस्सों में सोच भौतिकवादी दृष्टिकोण से प्रभावित है, जबकि भारत का नजरिया केवल धन कमाने तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, ''भारत में हम केवल धन कमाने के बारे में नहीं सोचते। लोग कहते हैं कि पैसा तो मुर्गी भी नहीं खाएगी। हम ऐसे ही हैं।''
आरएसएस प्रमुख ने उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना होगा और सफलता हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करना होगा।
भागवत ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी और तुलनात्मक रूप से कम भौगोलिक क्षेत्रफल के कारण वह कनाडा, अमेरिका और चीन जैसे देशों द्वारा अपनाए गए रास्ते को सीधे नहीं अपना सकता।
उन्होंने कहा, ''जिन देशों की आबादी कम है, जिनका भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा है या जिनके पास प्रचुर संसाधन हैं, उनके लिए केवल रोजगार के बारे में सोचना पर्याप्त हो सकता है। लेकिन भारत जैसे देश की आबादी बहुत बड़ी है और उसका भौगोलिक क्षेत्र कनाडा, अमेरिका और चीन की तुलना में छोटा है। इसलिए हमें अपनी समस्याओं के लिए पूरी तरह अलग सोच विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए हमें इन विषयों का गहराई से अध्ययन करना होगा।''
भाषा खारी रंजन
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