एमएसएमई को 'चैंपियन' बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष, अन्य उपायों की बजट घोषणा
निहारिका
- 01 Feb 2026, 04:13 PM
- Updated: 04:13 PM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को 'चैंपियन' बनाने के लिए तीन-आयामी रणनीति अपना रही है जिसमें 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित कोष भी शामिल है।
सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार सृजन, उत्पादकता बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि तेज करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।
उन्होंने कहा कि बजट की रीति-नीति तीन कर्तव्यों पर आधारित है जिसमें आर्थिक वृद्धि को तेज और स्थायी बनाना, आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण तथा सबका साथ, सबका विकास।
एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए वित्त मंत्री ने इक्विटी समर्थन, नगदी समर्थन और पेशेवर समर्थन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इक्विटी समर्थन के तहत 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष के माध्यम से चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई को तरलता समर्थन के लिए ट्रेड्स मंच की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) द्वारा सभी एमएसएमई खरीदारी का लेनदेन ट्रेड्स मंच पर करना, सीजीटीएमएसई के माध्यम से ऋण गारंटी प्रदान करना और जीईएम को कारोबार के साथ जोड़कर वित्तपोषण को तेज और सस्ता बनाना शामिल है।
इसके साथ ही सीतारमण ने 2021 में गठित 'आत्मनिर्भर भारत कोष' में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि डालने की घोषणा की ताकि सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी उपलब्ध रहे।
पेशेवर समर्थन के तहत आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई जैसी पेशेवर संस्थाओं को संक्षिप्त मॉड्यूलर पाठ्यक्रम तैयार करने और दूसरे एवं तीसरे दर्जे के शहरों में 'कॉरपोरेट मित्र' का एक कैडर तैयार करने के लिए व्यावहारिक साधन विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस पेशेवर समर्थन से एमएसएमई को किफायती दरों पर अनुपालन शर्तों पर खरा उतरने में मदद मिलेगी।
सीतारमण ने कहा कि इन पहलों के जरिये एमएसएमई की विकास क्षमता बढ़ाई जाएगी और उन्हें भविष्य के 'चैंपियन' बनने का अवसर मिलेगा।
वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक दस्तावेज के मुताबिक, संशोधित एवं अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाए जाने से एमएसएमई को किसी दंडात्मक कार्रवाई के डर के बगैर अपनी त्रुटियां सुधारने का अवसर मिलेगा।
वहीं, श्रम-बहुल एमएसएमई को लाभ पहुंचाने के लिए जनशक्ति आपूर्ति से जुड़े टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) प्रावधानों को भी सरल बनाया जाएगा।
इसके अलावा, प्रक्रियागत चूकों पर दंड के स्थान पर शुल्क लगाने का प्रावधान करने से विवादपरक मुकदमेबाजी में कमी आएगी और भरोसे पर आधारित अनुपालन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
भाषा प्रेम प्रेम निहारिका
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