बजट गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी, आंकड़े विश्वसनीय नहीं : अमित मित्रा
नरेश
- 01 Feb 2026, 07:29 PM
- Updated: 07:29 PM
कोलकाता, एक फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रधान मुख्य सलाहकार अमित मित्रा ने रविवार को केंद्रीय बजट को ''गरीब-विरोधी, किसान-विरोधी और मध्यम वर्ग-विरोधी'' बताया तथा वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में की गई भारी कटौती की आलोचना की।
मित्रा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों को प्रभावित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में वर्षों से लगातार कटौती की गई है जबकि घोषित आवंटन वास्तविक व्यय में तब्दील नहीं हो पाए हैं।
उन्होंने शिक्षा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि कुल व्यय का 5 से 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होना चाहिए था, लेकिन असल में यह वित्त वर्ष 2015-16 के 3.8 प्रतिशत से घटकर वर्तमान बजट अनुमान में 2.60 प्रतिशत रह गया है।
उर्वरक सब्सिडी के मुद्दे पर मित्रा ने आरोप लगाया कि 2015-16 में कुल व्यय के 4.04 प्रतिशत से आवंटन घटकर मौजूदा बजट अनुमानों में 3.19 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने कहा, ''यह एक गंभीर कटौती है और किसान विरोधी कदम है।''
उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों - अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों - के लिए आवंटन में कमी का भी मुद्दा उठाया और कहा कि व्यय 2015-16 में कुल बजट के 0.21 प्रतिशत से घटकर 0.19 प्रतिशत हो गया है और अनुमान है कि इसमें और भी गिरावट आएगी।
मित्रा ने कहा, ''यह कमजोर वर्गों की उपेक्षा को दर्शाता है।''
मित्रा ने प्रमुख योजनाओं में बजट अनुमानों, संशोधित अनुमानों और वास्तविक व्यय के बीच व्यापक अंतर की ओर भी इशारा किया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान को लगभग 30,170 करोड़ रुपये से संशोधित करके 13,670 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि वास्तविक व्यय केवल 5,815 करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले।
मित्रा ने कहा, ''ये उदाहरण दर्शाते हैं कि बजट अनुमान विश्वसनीय नहीं होते। वास्तविक आंकड़े आने तक आवंटन धराशायी हो जाते हैं।''
उन्होंने सवाल किया, ''बजट को विकासोन्मुखी और रोजगारोन्मुखी बताया गया। लेकिन जब शिक्षा, कृषि, आवास और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की जाती है, तो एक बुनियादी सवाल उठता है - यह बजट किसके लिए है?''
दानकुनी से सूरत तक नये माल ढुलाई गलियारे की बजट घोषणा पर मित्रा ने परियोजना को लागू करने के सरकार के वादों पर संदेह व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा माल ढुलाई गलियारे दस वर्षों से अधूरे पड़े हैं और यह परियोजना बिहार से लगी सीमा पर अभी अटकी हुई है।
भाषा सुभाष नरेश
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0102 1929 कोलकाता