मैकाले के षड्यंत्रों ने लोगों में हीनभावना भरी, इस सरकार ने ही उसे तोड़ने का साहस किया है: मुर्मू
मनीषा
- 28 Jan 2026, 04:28 PM
- Updated: 04:28 PM
नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि गुलामी के कालखंड में मैकाले के षड्यंत्रों ने भारत के लोगों में हीनभावना भरी थी, लेकिन आजादी के बाद पहली बार इस सरकार ने ही उसे तोड़ने का साहस किया है।
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जितना महत्व आधुनिक विकास को देना है, उतना ही महत्व अपने राष्ट्रीय आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वाभिमान को भी देना है।
उन्होंने कहा, ''सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भारत विश्व के समृद्धतम देशों में से एक है। मेरी सरकार इस विरासत को देश की ताकत बनाने के लिए काम कर रही है।''
मुर्मू ने ब्रिटिश शासन के एक अधिकारी का जिक्र करते हुए कहा, ''गुलामी के कालखंड में मैकाले के षड्यंत्रों द्वारा भारत के लोगों में हीन-भावना भरने का काम किया गया था। अब आज़ादी के बाद पहली बार मेरी सरकार ने ही उसे तोड़ने का साहस किया है।''
उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और संवारने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ''इसी दिशा में मेरी सरकार के प्रयासों से सवा सौ वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष वापस भारत लौटे हैं। उन्हें अब सामान्य जनमानस के दर्शन के लिए समर्पित किया गया है।''
मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर के नवनिर्माण के 75 वर्ष भी पूरे होने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद एक हजार वर्षों की यात्रा, भारत की धार्मिक निष्ठा, सनातन संस्कृति और चिर आस्था का प्रतीक है। इस अवसर पर जिस उत्साह से देश भर के लोगों ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लिया है, वह अतुलनीय है।''
राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ ही समय पूर्व, राजेन्द्र चोल द्वारा गंगईकोंडा-चोलापुरम् की स्थापना के भी 1000 वर्ष पूरे हुए। इस अवसर ने भी करोड़ों देशवासियों को अपने अतीत पर गर्व करने का मौका दिया है।
उन्होंने कहा कि दीपावली की पूरी दुनिया में बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही यूनेस्को द्वारा उसे मान्यता देना भारतीयों के लिए गर्व की बात है।
राष्ट्रपति ने कहा, ''जब हम अपनी परम्पराओं और संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो विश्व भी उनका सम्मान करता है।''
उन्होंने कहा, ''पिछले साल यूनेस्को ने हमारे पर्व दीपावली को अपनी 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की सूची में शामिल किया है। दीपावली की पूरी दुनिया में बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही यूनेस्को द्वारा उसे मान्यता देना हम सब भारतीयों के लिए गर्व की बात है।''
मुर्मू ने कहा, ''सरकार देश की आदिवासी विरासत को संरक्षित करने के लिए आदिवासी संग्रहालय भी बनवा रही है। इसी क्रम में हाल में छत्तीसगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय को लोकार्पित भी किया गया है।''
उन्होंने कहा, ''मुझे यह कहते हुये प्रसन्नता हो रही है कि मेरी सरकार ने देश के संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद करवाकर आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाया है।''
भाषा वैभव मनीषा
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