गणतंत्र दिवस समारोह: ऑपरेशन सिंदूर में भारत की जीत को कर्तव्य पथ पर किया गया प्रदर्शित
नोमान
- 26 Jan 2026, 08:44 PM
- Updated: 08:44 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सेना के तीनों अंगों की झांकी में राफेल और सुखोई सु-30एमकेआई लड़ाकू विमान और एस-400 प्रणाली सहित प्रमुख हथियार प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया।
इन हथियार प्रणालियों को भारतीय सेना ने पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात किया था।
इसके अलावा, एक ट्रेलर पर रखे कांच के आवरण के अंदर एक एकीकृत परिचालन केंद्र का मॉडल प्रदर्शित किया गया, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसे शक्तिशाली हथियार प्रणालियों के उपयोग से निर्णायक सैन्य कार्रवाई के संचालन को दर्शाया गया।
इसमें भारत की प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 'सुदर्शन चक्र' योजना की एक प्रतीकात्मक झलक पेश की गई, जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वायु रक्षा प्रणाली से लैस करना है।
मिशन 'सुदर्शन चक्र' की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 में लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में की थी।
ट्रेलर के पिछले हिस्से में ब्रह्मोस मिसाइलों को दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते हुए दिखाया गया, जबकि अर्धगोलाकार कांच के कवच के अंदर कुछ सैन्यकर्मी और नागरिक मौजूद थे, जो सुरक्षा की भावना का प्रतीक है।
गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल, रॉकेट लॉन्चर प्रणाली 'सूर्यास्त्र', मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन और नवगठित शक्तिबाण रेजिमेंट सहित अपनी अग्रिम पंक्ति की सैन्य प्रणालियों का प्रदर्शन किया।
कर्तव्य पथ पर आयोजित समारोह में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न भी मनाया गया, जिसमें फ्लाईपास्ट के दौरान तीर के आकार की एक विशेष आकृति बनाई गई और सेना के तीनों अंगों की एक विशेष झांकी निकाली गई, जो पाकिस्तान के साथ 7 से 10 मई के संघर्ष के दौरान थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के बीच तालमेल को दर्शाती है।
सेना के तीनों अंगों की झांकी सैन्य मामले के विभाग की थी। इस झांकी को दो भागों में विभाजित किया गया था।
एक तरफ जहां घातक सैन्य हथियारों को प्रदर्शित किया गया, जो अभियान के दौरान बेहद महत्वपूर्ण साबित हुईं। वहीं दूसरी तरफ, दुश्मन के बुनियादी ढांचे के विध्वंस को दर्शाया गया।
एक सैन्य अधिकारी ने पिछले हफ्ते 'पीटीआई-भाषा' को बताया था, ''हम संयुक्त प्रयासों से हासिल की गई अपनी जीत का संदेश देना चाहते हैं। यह 88 घंटे का अभियान था।''
वायुसेना मुख्यालय ने ''संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक'' विषय पर एक झांकी प्रस्तुत की, जिसमें सेवा के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व सैनिकों के योगदान को सम्मानित किया गया।
झांकी के अग्र भाग में अमर जवान ज्योति, ऐतिहासिक युद्ध मशीनों के 3डी मॉडल प्रदर्शित किये गए, जिनमें टी-55 और विजयंत टैंक, मिग-21, मिराज-2000 और जगुआर विमान, आईएनएस मैसूर और आईएनएस राजपूत तथा 1965, 1971 के युद्धों और 1999 के कारगिल विजय को दर्शाया गया।
झांकी के पिछले हिस्से में, राष्ट्रीय विकास में पूर्व सैनिकों की भूमिका को दर्शाया गया, जिसमें बाढ़ राहत, चिकित्सा सेवाओं, शिक्षा और 'मेक इन इंडिया' पहल में उनके स्वैच्छिक प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।
नौसेना मुख्यालय द्वारा भी एक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें 'मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना' विषय का जीवंत चित्रण किया गया था।
इसमें पांचवीं शताब्दी ईस्वी का एक जहाज दर्शाया गया, जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य नाम से जाना जाता है। साथ ही, मराठा नौसेना के गुरब श्रेणी के जहाज और आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि सहित स्वदेशी अग्रिम पंक्ति के पोत भी शामिल थे।
इस झांकी में भारतीय नौसेना के पोत तारिणी द्वारा नविका सागर परिक्रमा-2 अभियान के दौरान तय किए गए विश्व भ्रमण मार्ग का चित्रण किया गया।
नविका सागर परिक्रमा 2 के चालक दल में शामिल लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ने संयुक्त रूप से झांकी का नेतृत्व किया।
नौसेना कर्मियों के अलावा, मुंबई में युवाओं को बुनियादी समुद्री कौशल प्रदान करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन, सी कैडेट्स कोर के युवा कैडेट भी नौसेना की झांकी के साथ मार्च में शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष की झांकियों का व्यापक विषय 'स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्' और 'समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत' था, जो 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने और देश की समृद्ध व जीवंत सांस्कृतिक विविधता के बीच विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आत्मनिर्भरता के बल पर हुई तीव्र प्रगति का अनूठा मिश्रण प्रदर्शित करता है।
भाषा सुभाष नोमान
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