विश्वस्तरीय पर्यवेक्षण ढांचे के लिए अंतरिक्ष विज्ञानियों ने बजट की सराहना की
नरेश
- 01 Feb 2026, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
चेन्नई, एक फरवरी (भाषा) भारतीय खगोल विज्ञान समुदाय ने रविवार को विश्वस्तरीय पर्यवेक्षण ढांचे के निर्माण के लिए ऐतिहासिक प्रयास को लेकर केंद्रीय बजट 2026-27 की तारीफ करते हुए इसे एक परिवर्तनकारी कदम बताया एवं कहा कि इससे घरेलू अनुसंधानकर्ता वैश्विक समकक्षों के बराबर खोज-स्तरीय विज्ञान का नेतृत्व करने में सक्षम बन पायेंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में चार प्रमुख दूरबीन सुविधाओं - नेशनल लार्ज सौलर टेलीस्कोप (एनएलएसटी), नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलीस्कोप, हिमालयन चंद्र दूरबीन (यूएचसीटी) के उन्नयन और कॉसमॉस 2 तारामंडल परियोजना के लिए धन आवंटित किया गया है।
'इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए)' के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इस घोषणा से वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का योगदान धीरे-धीरे बढ़ेगा और व्यापक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
आईएसपीए की एक विज्ञप्ति में भट्ट ने कहा, ''टेलीस्कोप बुनियादी ढांचा और शिक्षण सुविधाओं के विस्तार की घोषणा खगोल भौतिकी और खगोल विज्ञान में भारत के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।'
कोलकाता स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के प्रख्यात सौर भौतिक विज्ञानी दिब्येंदु नंदी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि विश्व स्तर पर विशाल वेधशाला श्रेणी की दूरबीन दुर्लभ हैं और अंतरराष्ट्रीय मांग अधिक होने के कारण अवलोकन का समय मिलना अक्सर मुश्किल होता है।
कोलकाता स्थित इस प्रमुख संस्थान में अंतरिक्ष विज्ञान उत्कृष्टता केंद्र (सीईएसएसआई) की स्थापना करने वाले नंदी ने कहा, ''घरेलू सुविधाएं होने से भारतीय अनुसंधानकर्ताओं की अगली पीढ़ी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में अधिक योगदान दे सकेगी।''
'मेगा साइंस विजन डॉक्यूमेंट' से जुड़ी समिति के सह अध्यक्ष रह चुके अशोका विश्वविद्यालय के कुलपति सोमक रायचौधरी ने कहा कि भारतीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी समुदाय की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं को सरकार का समर्थन करते देखना उत्साहजनक था।
बेंगलुरु के भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने 'एक्स' पर इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि एनएलएसटी और यूएचसीटी के लिए किया जा रहा प्रयास भारत को सौर, गुरुत्वाकर्षण-तरंग और रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक नेताओं में शामिल करेगा।
भाषा
राजकुमार नरेश
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