श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग, अन्य प्रमुख सड़कों पर यातायात बहाली के प्रयास जारी
पारुल
- 24 Jan 2026, 07:10 PM
- Updated: 07:10 PM
(तस्वीरों के साथ)
जम्मू, 24 जनवरी (भाषा) श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख सड़कों पर यातायात बहाल करने के लिए बड़े पैमाने पर सड़कों को साफ करने का अभियान चलाया गया, क्योंकि बर्फबारी के बाद विभिन्न हिस्सों में सड़कें फिसलन भरी स्थितियों के कारण शनिवार को दूसरे दिन भी बंद रहीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि सेना, पुलिस और नागरिक प्रशासन द्वारा सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया और उन्हें भोजन व आश्रय प्रदान किया गया। ये यात्री कश्मीर को देश के शेष भाग से जोड़ने वाली एकमात्र बारहमासी सड़क-270 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे हुए थे।
राष्ट्रीय राजमार्ग (बनिहाल) के पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) एसपी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बर्फ हटाने का अभियान अंतिम चरण में है और दोनों तरफ फंसे वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर निकाला जाएगा।
राजमार्ग के रामबन खंड में 900 से अधिक वाहन फंसे हुए हैं, जबकि आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक सहित 2,000 से अधिक अन्य वाहन जम्मू, उधमपुर, कुलगाम और अनंतनाग जिलों में अपने गंतव्यों की ओर जाने के लिए हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं।
सिंह ने कहा, "रामसू-बनिहाल सेक्टर में राजमार्ग के कुछ हिस्से फिसलन भरे हैं और सड़क सफाई एजेंसियां स्थिति में सुधार करने के लिए सड़क पर नमक और यूरिया का छिड़काव कर रही हैं, ताकि वाहन सुरक्षित तरीके से चलाए जा सकें।"
उन्होंने कहा कि फंसे हुए वाहनों को हटा दिए जाने के बाद सामान्य यातायात बहाल होने की संभावना है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 मार्ग को प्रभावित करने वाले भारी हिमपात और चरम मौसमी स्थितियों के बीच सेना ने एक बार फिर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया, जिसमें पर्यटकों सहित फंसे हुए लोगों को समय पर सहायता प्रदान की गई।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि नचलाना सैन्य शिविर के सैनिकों ने भारी हिमपात, सड़क अवरोध और शून्य से नीचे तापमान के कारण उत्पन्न कई मुश्किल स्थितियों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि नागरिकों और पर्यटकों को ले जा रहे कई वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर फंसे हुए हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को खराब मौसम में पर्याप्त भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता संबंधी परेशानियां हुईं।
अधिकारी ने बताया कि सेना के जवान तुरंत प्रभावित लोगों तक पहुंचे और उन्हें भोजन, पीने का पानी, गर्म चाय और आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की, जिससे जरूरतमंद सभी लोगों की सुरक्षा और राहत सुनिश्चित हुई।
अधिकारी के अनुसार, भारी बर्फबारी के कारण 'वॉरियर्स ताइक्वांडो अकादमी' के 32 मार्शल आर्ट कैडेट, अपने प्रशिक्षकों और माता-पिता के साथ नाचलाना के पास फंस गए।
उन्होंने बताया, "भोजन, पानी या आश्रय की अनुपलब्धता के कारण समूह को (विशेष रूप से छोटे बच्चों को) गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। करुणा और पेशेवर क्षमता का परिचय देते हुए सेना के जवानों ने उन्हें नचलाना शिविर में पहुंचाया, जहां मौसम सुधरने और हिमपात रुकने तक उन्हें गर्म भोजन, पीने का पानी, प्राथमिक चिकित्सा, गर्म कपड़े और सुरक्षित आवास प्रदान किया गया।"
अधिकारी ने बताया कि संगलदान रेलवे स्टेशन पर फंसे यात्रियों और स्थानीय रेलवे अधिकारियों की ओर से मिली एक आपातकालीन कॉल के बाद संगलदान सैन्य शिविर के जवानों ने शुक्रवार को हिमपात के बावजूद 65 फंसे हुए यात्रियों को आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराईं।
यातायात विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा मुगल रोड, सिंथन टॉप रोड, श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और विभिन्न जिलों की दर्जनों अन्य सड़कों पर भी हिमपात के मद्देनजर यातायात रोक दिया गया।
अधिकारी ने कहा, "लोगों को सलाह दी जाती है कि जब तक ये सड़कें पूरी तरह से साफ नहीं कर ली जातीं और यातायात के लिए सुरक्षित घोषित नहीं कर दी जातीं, तब तक इन पर यात्रा न करें।"
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) जम्मू-राजौरी-पूंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को बहाल करने के लिए बर्फ हटाने का अभियान चला रहा है।
बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को भारी हिमपात के बाद राजौरी के बीजी और पुंछ की जर्रान वाली गली के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राजमार्ग बंद हो गया है।
उन्होंने कहा कि बीआरओ के कर्मचारी और मशीनरी सड़क की मरम्मत करने और उसे यातायात के लिए खोलने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
जम्मू क्षेत्र के उंचाई वाले अधिकांश इलाकों में (जिनमें पटनीटॉप, नत्थाटॉप और भद्रवाह जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शामिल हैं) शुक्रवार को मध्यम से भारी हिमपात हुआ, जबकि मैदानी इलाकों (जिनमें जम्मू शहर भी शामिल है) में बारिश के बाद दो महीने से अधिक समय से जारी सूखा समाप्त हुआ। वहीं, राजौरी, डोडा और उधमपुर के कुछ हिस्सों में एक दशक से अधिक समय के बाद हिमपात हुआ।
भाषा
शुभम पारुल
पारुल
2401 1910 जम्मू