दिल्ली की अदालत ने एक व्यक्ति को बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया
अमित संतोष
- 23 Aug 2025, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को दो साल की बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के 2014 के मामले में शनिवार को दोषी ठहराया और कहा कि अभियोजन पक्ष ने उसके खिलाफ आरोप साबित किये हैं।
कथित "मनोरोगी" और "सीरियल किलर" रवीन्द्र, 2015 में छह साल की बच्ची के साथ हुए क्रूर बलात्कार और हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। उसे इस मामले में मई 2023 में सजा सुनायी गई थी।
वर्ष 2023 में एक अदालत ने कहा था कि निर्मम बलात्कार और हत्या इतनी वीभत्स और अमानवीय थी कि दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत आरोपी रवीन्द्र के खिलाफ मामले की सुनवायी कर रहे थे, जिसके खिलाफ समयपुर बादली पुलिस थाने ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 363 (अपहरण) के तहत मामला दर्ज किया था।
विशेष लोक अभियोजक विनीत दहिया और आदित्य कुमार ने कहा कि आरोपी एक "सीरियल किलर" था, जिसके खिलाफ "नाबालिग बच्चों के अपहरण, बलात्कार और हत्या" के लिए 25 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हैं। कुमार ने यह भी कहा कि रवीन्द्र "एक मनोरोगी ‘सीरियल किलर’ है और उसने बच्चों को ही निशाना बनाया है।"
हालांकि, 23 अगस्त के आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपी की इसी तरह के अपराधों में पिछली संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन कुछ हद तक इस पर विचार किया जा सकता है।
उसने कहा, ‘‘यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि पीड़ित बच्ची 13 अप्रैल, 2014 को शाम लगभग 6:30 बजे अपने घर से लापता हो गई थी और उसके बाद उसी दिन शाम लगभग 7:30-8:00 बजे उसे आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था।’’
अदालत ने कहा कि यह भी स्थापित हो चुका है कि बच्ची का शव उस स्थान के निकट से बरामद किया गया था जहां रवीन्द्र को आखिरी बार बच्ची के साथ देखा गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, यदि बच्ची की मृत्यु हुई है, तो आरोपी के विरुद्ध यह बहुत मजबूत साक्ष्य है कि अपराध उसकी हिरासत या उसके साथ रहते हुए हुआ और इस साक्ष्य का खंडन करने का दायित्व आरोपी पर है। हालांकि, आरोपी के पास अपने प्रतिवाद में (बच्ची की मृत्यु समझाने के लिए) कोई साक्ष्य नहीं है।’’
उसने कहा कि अंतिम बार देखने का सिद्धांत रवीन्द्र के खिलाफ "एक निर्णायक प्रकार का साक्ष्य" है और यह किसी भी उचित संदेह से परे उसके अपराध को साबित करने के लिए "पूरी तरह से पर्याप्त" है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा स्थापित तथ्य, आरोपी के विरुद्ध विधिवत सिद्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की एक पूरी श्रृंखला बनाते हैं।
रवीन्द्र को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आरोपी ने बच्ची को माता-पिता के पास से अगवा किया था।
हत्या के अपराध के संबंध में, अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गौर किया, जिसके अनुसार मौत कोमा और दम घुटने से हुई थी। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के सिर पर चोट थी और दोनों होठों में सूजन थी।
अदालत ने कहा, ‘‘बच्ची की आयु करीब ढाई वर्ष और इतनी छोटी बच्ची का शरीर इतना कोमल और नाजुक होता है कि एक छोटी सी चोट का भी बड़ा प्रभाव हो सकता है। यदि किसी वयस्क व्यक्ति द्वारा बच्ची का मुंह इतनी जोर से दबाया गया कि उसके होठों पर दांतों के निशान पड़ गए, तो इससे पता चलता है कि आरोपी का इरादा उक्त बच्ची की हत्या करना था।’’
सजा पर बहस 28 अगस्त को शुरू होगी।
इससे पहले मई 2023 में एक अदालत ने 2015 में छह साल की बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के लिए रवीन्द्र को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
भाषा अमित