काल गणना, भारतीय बीजगणित: यूजीसी स्नातक मसौदा पाठ्यक्रम में प्राचीन गणित पढ़ाने का प्रस्ताव
अमित माधव
- 23 Aug 2025, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) काल गणना (पारंपरिक भारतीय समय गणना), भारतीय बीजगणित, भारतीय परंपरा में पुराणों का महत्व, नारद पुराण में पाए जाने वाले बुनियादी अंकगणितीय संक्रियाओं और ज्यामिति से संबंधित गणितीय अवधारणाओं और तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करना, उन अवधारणाओं में शामिल है जिन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) चाहता है कि स्नातक छात्र गणित में अध्ययन करें।
मसौदा पाठ्यक्रम के अनुसार, यूजीसी ने भारतीय बीजगणित के इतिहास और विकास को पढ़ाने की सिफारिश की है, जिसमें परावर्त्य योजयात सूत्र (एक पारंपरिक वैदिक गणित तकनीक) का उपयोग करके बहुपदों का विभाजन शामिल है। मसौदा पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत लर्निंग आउटकम-आधारित पाठ्यचर्या रूपरेखा (एलओसीएफ) के साथ संरेखित है।
पाठ्यक्रम में पंचांग जैसी अवधारणाओं का शिक्षण तथा यह भी शामिल है कि यह अनुष्ठानों और त्योहारों में प्रयुक्त मुहूर्त का निर्धारण कैसे करता है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और संस्कृति का सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है तथा भारत की समृद्ध काल-विज्ञान विरासत को जीवंत करता है। इसमें प्राचीन वेधशालाओं, उज्जैन की प्रधान मध्याह्न रेखा और यह भी शामिल है कि प्राचीन भारतीय वैदिक काल इकाइयों, घटी और विघटी की तुलना ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) और भारतीय मानक समय (आईएसटी) जैसी आधुनिक प्रणालियों से कैसे की जाती है।
पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष सुशील के. तोमर ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह पाठ्यक्रम भारत में गणित शिक्षा के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी पहल साबित होगा। इसे व्यापक परामर्श और सहयोग के माध्यम से सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता और व्यावहारिक प्रासंगिकता दोनों सुनिश्चित होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी आकांक्षा पेशेवर रूप से सक्षम स्नातक तैयार करने की है, जो अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने में सक्षम हों, विशेष रूप से विज्ञान, अर्थशास्त्र, पर्यावरण और सतत विकास में अंतःविषयक चुनौतियों का समाधान करने में।’’
प्रस्तावित पाठ्यक्रम "सूर्य सिद्धांत" और "आर्यभट्टीयम" जैसे ग्रंथों का गहन अध्ययन करता है। यह ब्रह्मांडीय समय की संरचना - युगों और कल्पों से लेकर ब्रह्म वर्ष (ब्रह्मा के दिन) तक की व्याख्या करता है तथा विष्णु वर्ष और शिव वर्ष जैसे दिव्य समय चक्रों का परिचय देता है।
विभिन्न विषयों के एलओसीएफ, विश्वविद्यालयों और कॉलेज के लिए एनईपी 2020 के अनुरूप उनके पाठ्यक्रम संशोधन के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में काम करेंगे।
भाषा अमित