किफायती मकानों की मांग अच्छी; पर बेहतर लाभ के कारण कंपनियां लग्जरी घरों को दे रही तरजीह: विशेषज्ञ
अजय
- 20 Jul 2025, 02:59 PM
- Updated: 02:59 PM
(राधा रमण मिश्रा)
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) देश में रियल एस्टेट कंपनियां लग्जरी और प्रीमियम मकानों को अधिक तरजीह दे रही हैं। इसका कारण जहां जमीन की कीमत अधिक होने से मध्यम आय और किफायती श्रेणी के मकानों में कीमत को एक दायरे में रखने को लेकर चुनौती है, वहीं लग्जरी खंड में मार्जिन अधिक होने के साथ-साथ मांग भी अच्छी है। रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों ने यह बात कही है।
उनका कहना है कि सरकार शहरी और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए पीएमएवाई (प्रधानमंत्री आवास योजना) जैसे कार्यक्रमों के पुनरुद्धार और विस्तार के साथ नीतिगत समर्थन और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से मध्यम आय वर्ग की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सीबीआरई-एसोचैम की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश के सात प्रमुख शहरों में लक्जरी मकानों की बिक्री इस साल की पहली छमाही में 85 प्रतिशत बढ़कर करीब 7,000 इकाई रही। इसमें दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी सर्वाधिक 57 प्रतिशत, जबकि मुंबई की 29 प्रतिशत रही। देश के प्रमुख शहरों के साथ-साथ लखनऊ, जयपुर और कोच्चि जैसे अन्य मझोले और छोटे शहरों में भी अब लग्जरी आवास की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मांग को देखते हुए कंपनियां भी इन शहरों में अपनी परियोजनाएं पेश कर रही हैं।
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नारेडको (नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी हरि बाबू ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, ‘‘पिछली कुछ तिमाहियों से कंपनियों का रुझान लग्जरी और प्रीमियम मकानों की ओर बढ़ा है। इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है कि महामारी के बाद उच्च श्रेणी के घरों की मांग तेजी से बढ़ी है। मकान खरीदार विशेष रूप से उच्च आय वाले लोग (एचएनआई), प्रवासी भारतीय और महानगरों में काम करने वाले पेशेवर अब बड़े घरों के साथ बेहतर सुविधाओं और जीवनशैली की तलाश में हैं। लोगों की खरीद क्षमता बढ़ने से भी इस खंड में मांग बढ़ी है। दूसरा, लग्जरी मकानों के मामले में कंपनियों को अच्छा मार्जिन मिल रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वहीं दूसरी तरफ मध्यम आय और किफायती खंड में कीमतें संवेदनशील बनी हुई हैं। भूमि की ऊंची लागत के कारण किफायती श्रेणी के मकान निजी डेवलपर के लिए कम आकर्षक हो गए हैं।
रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाएं देने वाली कोलियर्स इंडिया के निदेशक और प्रमुख (उत्तर भारत और रिहायशी सेवाएं) दीपक मिश्रा ने भी कहा, ‘‘ कंपनियां लग्जरी मकानों को तरजीह दे रही हैं। इसका कारण अब घर खरीदार बड़े घरों, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक सुविधाओं वाले अपार्टमेंट, हरे-भरे इलाके और उन्नत क्लब सुविधाओं की तलाश कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आजकल घर खरीदार विभिन्न सुविधाओं वाले पूरे परिवेश की मांग कर रहे हैं। लोगों की खर्च योग्य आय बढ़ने तथा दीर्घकालीन निवेश के लिए भी लग्जरी मकानों की मांग बढ़ रही है।’’
हरि बाबू ने नाइट फ्रैंक के आंकड़ो का हवाला देते हुए कहा कि प्रीमियम आवास ने वर्ष 2025 की पहली छमाही में भारत के आवासीय बाजार में अपनी पकड़ बरकरार रखी है, जो कुल बिक्री का 49 प्रतिशत है। वहीं 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 18 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यह पूछे जाने पर कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा मध्यम आय वर्ग और किफायती आवास यानी 50 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के बीच के घर चाहता है, लेकिन इस श्रेणी में आने वाली परियोजनाओं की संख्या पर्याप्त नहीं है, हरि बाबू ने कहा, ‘‘हां, यह सही है...। देश में एक बड़ा तबका खासकर 50 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के दायरे में, घर खरीदने की इच्छा रखता है। यह श्रेणी कामकाजी मध्यम वर्ग की आवास आवश्यकताओं को पूरा करती है, जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हालांकि, मध्यम आय और किफायती श्रेणी में वर्तमान आपूर्ति, मांग को पूरा नहीं कर पा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ इसके कारणों में भूमि, निर्माण सामग्री और श्रम समेत कच्चे माल की लागत का अधिक होना है। इसकी वजह से कंपनियों के लिए एक मूल्य सीमा में कार्य करना मुश्किल हो रहा है।’’
मिश्रा ने भी कहा, ‘‘ मध्यम आय और किफायती वर्ग के मामले में नई परियोजनाएं कम पेश हो रही हैं। साथ ही इस खंड में पहले के बचे फ्लैट की कमी के कारण आपूर्ति कम है। दूसरी तरफ, कंपनियां कीमत को कम रखने की चुनौतियों का सामना कर रही हैं।’’
उल्लेखनीय है कि आमतौर पर राशि के हिसाब से मकानों को लग्जरी खंड में रखा जाता है। मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में छह करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले मकानों को लग्जरी श्रेणी में रखा जाता है। बेंगलुरु तथा हैदराबाद में इस श्रेणी में पांच करोड़ रुपये व उससे अधिक के मकान, जबकि पुणे, चेन्नई तथा कोलकाता में चार करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य के मकान आते हैं।
यह पूछे जाने पर कि मध्यम आय वर्ग के लोगों की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने में सरकार किस प्रकार सहायता कर सकती है, हरि बाबू ने कहा, ‘‘सरकार मध्यम आय वर्ग की घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए नीतिगत समर्थन और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके तहत सबसे पहले, शहरी और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए खासकर सब्सिडी और आय पात्रता स्लैब के संदर्भ में प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रमों का पुनरुद्धार और विस्तार महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।’’
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त आवास ऋण पर ब्याज कम करने से भी घर खरीदने में काफी प्रोत्साहन मिलेगा।
मिश्रा ने भी कहा कि सरकार कुछ योजनाओं और आवास में छूट देकर इस दिशा में पहल कर सकती है।’’
भाषा रमण