भोजशाला विवाद : शीर्ष अदालत जाने की तैयारी में मुस्लिम पक्ष, एएसआई रिपोर्ट को 'त्रुटिपूर्ण' बताया
जितेंद्र
- 15 May 2026, 07:36 PM
- Updated: 07:36 PM
इंदौर, 15 मई (भाषा) धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को सरस्वती मंदिर करार दिए जाने और इस मध्यकालीन स्मारक में नमाज की अनुमति समाप्त करने संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के शुक्रवार के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है।
मुस्लिम पक्ष के वकील अशहर वारसी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "हम भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसे शीर्ष अदालत में जल्द से जल्द चुनौती देंगे।"
उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में एएसआई का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और इसकी रिपोर्ट 'त्रुटिपूर्ण' थी तथा उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में मुख्य रूप से इस रिपोर्ट पर भरोसा किया है।
वारसी ने यह भी कहा कि 'विवादित तथ्यों वाले इस मामले' का निपटारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत नहीं किया जाना चाहिए था और इसे दीवानी अदालत भेजा जाना चाहिए था।
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालयों को लोगों के मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों के मामलों में अलग-अलग रिट (औपचारिक आदेश) जारी करने की शक्ति देता है।
वारसी ने बताया कि मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले उनके मुवक्किलों ने धार की एक दीवानी अदालत में भोजशाला मामले को लेकर पहले ही मुकदमा दायर कर रखा है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में निर्धारित की।
अदालत ने 242 पन्नों के फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
वारसी ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा एएसआई का यह आदेश रद्द किए जाने के बाद परिसर में शुक्रवार की नमाज की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई है, लेकिन मुस्लिम पक्ष को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय उसकी दलीलों पर विचार करते हुए इस व्यवस्था को बहाल करेगा।
एएसआई के आदेश में हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था। एएसआई ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।
एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया था कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था।
भाषा हर्ष जितेंद्र
जितेंद्र
1505 1936 इंदौर