परिसीमन से लोकसभा और राज्यसभा में किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए: जगन
सिम्मी रंजन
- 22 Mar 2025, 04:23 PM
- Updated: 04:23 PM
अमरावती, 22 मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शनिवार को अपील की कि परिसीमन प्रक्रिया इस तरह से की जाए जिससे सदन में कुल सीट की संख्या के संदर्भ में लोकसभा या राज्यसभा में किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व में कमी न आए।
युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख ने प्रधानमंत्री को 21 मार्च को लिखे पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला कि परिसीमन का मुद्दा इतना गंभीर है कि यह देश में सामाजिक और राजनीतिक सद्भाव को बाधित करने का कारण बन सकता है। इस पत्र की प्रति मीडिया से शनिवार को साझा की गई।
रेड्डी ने कहा, ‘‘परिसीमन प्रक्रिया को इस तरीके से करने का अनुरोध किया जाता है कि सदन में कुल सीट की संख्या के संदर्भ में लोकसभा या राज्यसभा में किसी राज्य के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आए।’’
विपक्षी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान में इस तरह संशोधन किया जाना चाहिए कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं हो।
उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल नीति और कानून निर्माण में कुछ राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ता है, बल्कि भारत की आबादी के बड़े हिस्से की गहरी भावनाएं भी प्रभावित होती हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने कहा, ‘‘महोदय, इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर देता हूं।’’
उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच जनसंख्या नियंत्रण में असंतुलन एक बड़ा मुद्दा है।
उनका पत्र ऐसे समय में साझा किया गया है जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के निमंत्रण पर कई दल परिसीमन प्रक्रिया पर विचार-विमर्श करने के लिए चेन्नई में बैठक कर रहे हैं।
परिसीमन प्रक्रिया पर मौजूदा प्रतिबंध को 84वें संविधान संशोधन ने 2026 तक बढ़ा दिया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्यों के लिए संसद में सीट की संख्या पुनर्व्यवस्थित हो जाएगी।
वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता वाई वी सुब्बा रेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी का पत्र प्रधानमंत्री और द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पार्टी के नेताओं को भेजा, जिसमें परिसीमन प्रक्रिया में निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हालांकि, वाईएसआरसीपी ने द्रमुक द्वारा परिसीमन पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जबकि द्रमुक के नेताओं-तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री ई वी वेलु और द्रमुक के राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने हाल में जगन मोहन रेड्डी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और उन्हें आमंत्रित किया था।
जगन मोहन ने इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया के 2026 में संभावित जनगणना के बाद होने की धारणा ‘‘कई राज्यों के लिए गंभीर चिंता’’ पैदा कर रही है, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों को डर है कि उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने कहा कि यद्यपि 42वें और 84वें संविधान संशोधनों ने परिसीमन प्रक्रिया को इस उम्मीद के साथ स्थगित कर दिया था कि राज्य परिवार नियोजन के संबंध में समान स्तर की सफलता हासिल करेंगे, लेकिन 2011 की जनगणना ने इसे गलत साबित कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनसंख्या में दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी 1971 से 2011 के बीच 40 वर्ष की अवधि में कम हुई है। हमारा मानना है कि पिछले 15 वर्ष की अवधि में यह हिस्सा और भी कम हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों का ईमानदारी से पालन किया है।
जगन मोहन रेड्डी ने मोदी का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि यदि परिसीमन प्रक्रिया वर्तमान स्थिति के अनुसार जनसंख्या के आधार पर की गई तो राष्ट्रीय नीति-निर्माण और विधायी प्रक्रिया में दक्षिणी राज्यों की भागीदारी कम हो जाएगी।
वाईएसआरसीपी सुप्रीमो ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर मोदी का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन सबसे महत्वपूर्ण है और प्रधानमंत्री का आश्वासन कई राज्यों की आशंकाओं को दूर करने में बहुत योगदान देगा।
भाषा सिम्मी