मतदाता सूची में ‘हेराफेरी’ में निर्वाचन आयोग की ‘संलिप्तता’ :कांग्रेस नेता
वैभव नरेश
- 03 Mar 2025, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को निर्वाचन आयोग पर मतदाता सूची में ‘हेरफेर’ करने में ‘संलिप्त’ होने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी कानूनी, राजनीतिक और विधायी साधनों के माध्यम से समाधान की तलाश में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के एक समूह ने एक ही पहचान संख्या वाले कई मतदाताओं पर निर्वाचन आयोग (ईसी) की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को ऐसे ही जाने नहीं देगी क्योंकि इससे देश के चुनावी लोकतंत्र को गंभीर खतरा है।
कांग्रेस के नेताओं और विशेषज्ञों के अधिकार प्राप्त कार्य समूह (ईगल) ने एक बयान में कहा, ‘‘यह चुनावी लोकतंत्र के रूप में भारत के विचार के लिए एक गंभीर खतरा है। यह राजनीतिक दलों और राजनीति से परे है। बाबासाहेब आंबेडकर ने चुनावों में विधायिका के हस्तक्षेप का विरोध करने के लिए एक स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी थी। कांग्रेस इस मुद्दे को मिटने नहीं देगी और वह कानूनी, राजनीतिक, विधायी तथा किसी भी अन्य माध्यम से समाधान की तलाश में सक्रिय रूप से काम कर रही है।’’
इस समूह में अजय माकन, दिग्विजय सिंह, अभिषेक सिंघवी, पवन खेड़ा, गुरदीप सिंह सप्पल, नितिन राउत और वामशी चंद रेड्डी शामिल हैं।
समूह ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची में ‘हेरफेर’ में ‘सहभागी’ है और दावा किया कि इस मुद्दे पर कुछ चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए हैं।
समूह ने कहा, ‘‘एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या का उपयोग कई मतदाताओं के लिए किया जा रहा है, चाहे वे एक ही राज्य के एक ही निर्वाचन क्षेत्र के हों या दूसरे राज्यों के। यह पूरी तरह से चौंकाने वाला है। प्रत्येक भारतीय मतदाता के लिए एक अद्वितीय मतदाता पहचान पत्र एक स्वच्छ मतदाता सूची की मूलभूत आवश्यकता और आधार है। एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या वाले कई मतदाता एक ही पंजीकरण संख्या वाले कई वाहनों की तरह विचित्र हैं। किसी भी चुनावी लोकतंत्र में ऐसा सुनने में नहीं आता है।’’
दिसंबर में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूचियों में ‘भारी अनियमितताओं और असामान्य स्थितियों’ की ओर इशारा किया था।
उन्होंने कहा था, ‘‘यह तार्किक और सांख्यिकीय दोनों तरह से बेतुका है कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच पांच महीनों में (40 लाख) ज्यादा नए मतदाता पंजीकृत किए, जबकि 2019 और 2024 के बीच पूरे पांच साल की अवधि में (32 लाख) इतने मतदाता पंजीकृत नहीं किए गए।’’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में यह मुद्दा उठाया था। इस मामले पर महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन के घटक दलों ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन भी बुलाया था।
कांग्रेस नेताओं ने बयान में कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग की चुप्पी ने मतदाता सूची में हेराफेरी में उसकी मिलीभगत को और पुख्ता किया है। जब कई मतदाताओं द्वारा एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या का इस्तेमाल किए जाने के सबूत सामने आए, तो आयोग ने शुरू में यह दावा किया कि एक मतदाता पहचान पत्र संख्या सभी राज्यों में हो सकती है, लेकिन यह किसी एक राज्य के लिए अलग होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह भी एक सरासर झूठ निकला, क्योंकि एक ही राज्य और एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई मतदाताओं द्वारा एक ही पहचान पत्र संख्या का इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं। इस ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद इस पर चुप्पी साध ली गई है।’’
यह प्राथमिक ज्ञान है कि जो व्यक्ति कानूनी रूप से किसी भी राज्य में प्रवास कर सकता है, उसके पास पूरे देश में एक अद्वितीय मतदाता पहचान पत्र संख्या होनी चाहिए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग इस मामले में अज्ञानता या अक्षमता का दिखावा नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि यह सत्तारूढ़ पार्टी की मदद करने और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के विचार को विफल करने के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी करने का एक जानबूझकर किया गया कार्य है।
नेताओं ने कहा, ‘‘अब पर्दा उठ चुका है। यह स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ भाजपा निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से मतदाता सूचियों में हेराफेरी करके चुनाव जीतती है या जीतने का प्रयास करती है। यही कारण है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए इतनी महत्वपूर्ण है कि उसने उनकी नियुक्ति के लिए संतुलित समिति बनाने की उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था को ही दरकिनार कर दिया।’’
भाषा वैभव