तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने ममता के साथ मतभेद की अटकलों को खारिज किया
सुरभि नरेश
- 27 Feb 2025, 03:45 PM
- Updated: 03:45 PM
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 27 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस से सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ कथित ‘मतभेद’ की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह पार्टी के एक ‘‘निष्ठावान सिपाही’’ बने रहेंगे तथा पार्टी सुप्रीमो को अपनी नेता मानते हैं।
यहां नेताजी इनडोर स्टेडियम में तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए अभिषेक ने दावा किया कि जब भी चुनाव नजदीक आता है तो विपक्ष आदतन इस तरह की ‘‘अफवाहें’’ फैलाने का सहारा लेता है।
बैठक का उद्देश्य राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना था।
अभिषेक ने कहा, ‘‘जो लोग कह रहे हैं कि मैं भाजपा में शामिल हो रहा हूं, मैं आपको बता दूं कि अगर मेरा सिर भी कलम कर दिया जाए तब भी मैं मरते दम तक ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ का नारा ही लगाऊंगा।’’
अभिषेक का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि हाल में वह तृणमूल की संगठनात्मक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका से गायब रहे हैं और उनका ध्यान मुख्य रूप से सामाजिक कल्याण के कार्यों पर ही रहा है और वह भी उनके निर्वाचन क्षेत्र डायमंड हार्बर तक ही सीमित रहा है।
सांसद ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों को जानता हूं जो ऐसी झूठी खबरें फैला रहे हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उनके निहित स्वार्थ हैं।’’
मुकुल रॉय और शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए अभिषेक ने कहा कि उन्होंने इससे पहले हुए चुनाव से पूर्व ‘‘गद्दार के रूप में उनकी पहचान’’ की थी।
डायमंड हार्बर से सांसद ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें पहले भी बेनकाब किया था। जो भी हमारी पार्टी के अंदर अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है मैं एक बार फिर उन्हें बेनकाब करूंगा।’’
पार्टी में अनुशासन का पालन करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अभिषेक ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं को सार्वजनिक क्षेत्र में अपने बयानों को लेकर सावधान रहने के लिए सचेत किया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप सोचते हैं कि आप एक सांसद या विधायक या ‘ब्लॉक’ अध्यक्ष हैं और आपको सार्वजनिक रूप से ऐसी बातें कहने की छूट है जो पार्टी को नीचा दिखाती हैं तथा इसकी स्थिति को कमजोर करती हैं, तो आप गलत हैं। ऐसा करने वालों की पहचान पहले ही हो चुकी है। हममें से हर कोई संगठन के नियमों द्वारा निर्देशित होता है। राज्य चुनावों से पहले आपके काम में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।’’
पार्टी सदस्यों से आंतरिक संघर्षों के बजाय जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हुए बनर्जी ने कहा, ‘‘अपने मतभेदों को भूलकर लोगों के लिए काम करने पर ध्यान केंद्रित करें। साजिशों में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। व्हाट्सऐप ग्रुप की राजनीति में लिप्त लोगों को पता होना चाहिए कि इस तरह के प्रयास व्यर्थ होंगे। साजिश करने वालों पर ही इसका असर पड़ेगा।’’
शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नए आरोप पत्र का हवाला देते हुए पार्टी में दूसरे नंबर के नेता माने जाने वाले अभिषेक ने एजेंसी पर ‘‘अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने’’ का आरोप लगाया।
अभिषेक ने दावा किया, ‘‘मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि सीबीआई इतनी डरी हुई है कि वह अप्रत्यक्ष तरीके से मुझ पर उंगली उठा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास मेरे खिलाफ कार्रवाई के योग्य सबूत नहीं हैं। मैंने यह पांच साल पहले भी कहा था और मैं इसे फिर से कहूंगा कि अगर आप एक भी ऐसा सबूत पेश कर सकते हैं जो मुझे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से जोड़ता हो, तो आपको आरोपपत्र लिखने की जरूरत नहीं है। बस उन्हें अदालत में साबित करें और फांसी का फंदा तैयार करें। मैं खुशी-खुशी फांसी के फंदे पर लटक जाऊंगा।’’
उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी बिगुल बजाते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से 292 सदस्यीय राज्य विधानसभा में ‘‘मौजूदा 214 से कम से कम एक अतिरिक्त सीट’’ जीतने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा।
उन्होंने दावा किया, ‘‘भाजपा के पास ईडी-सीबीआई-आयकर की तिकड़ी है, जो उसके लिए काम करती है। लेकिन उनमें सड़कों पर लड़ने की हिम्मत नहीं है। हम भाजपा के ‘चक्रव्यूह’ को तोड़ देंगे। हमने पहले भी ऐसा किया है। ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम इसे फिर से न कर सकें।’’
भाषा सुरभि