एआई के दुरुपयोग पर दिल्ली के निजी स्कूलों की पैनी नजर
वैभव नरेश
- 12 Feb 2025, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) वरदान है या अभिशाप? जैसे-जैसे यह बहस तेज होती जा रही है, दिल्ली के कई निजी स्कूल एआई के दुरुपयोग को लेकर चिंतित हैं और यह पता लगाने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं कि छात्र अपना काम पूरा करने के लिए इसकी मदद तो नहीं ले रहे?
कई शिक्षकों के अनुसार, डर यह है कि एआई के अत्यधिक उपयोग से रचनात्मकता बाधित होगी।
द्वारका में आईटीएल इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य सुधा आचार्य कहती हैं, ‘‘हम यह पता लगाने के लिए विभिन्न सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं कि छात्रों ने अपने असाइनमेंट पूरा करने के लिए एआई का उपयोग तो नहीं किया।’’
उन्होंने आशंका जताई कि एआई से जुड़े टूल का अत्यधिक उपयोग करने से छात्रों की रचनात्मकता बाधित होगी।
आचार्य ने कहा, ‘‘यदि कोई छात्र आंतरिक मूल्यांकन के लिए एआई का उपयोग करता हुआ पाया जाता है, तो उसे शून्य अंक मिलते हैं।’’
‘पीटीआई-भाषा’ से बात करने वाले शिक्षकों के अनुसार, एआई वरदान या अभिशाप हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसका उपयोग कैसे किया जाता है।
वे कहते हैं कि यदि छात्र इसका उपयोग नए कौशल विकसित करने के लिए करते हैं तो यह अत्यधिक लाभकारी हो सकता है, लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भरता नुकसानदेह हो सकती है।
ग्रेटर कैलाश में टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य मल्लिका प्रेमन का मानना है कि तकनीकी प्रगति के साथ, छात्रों को आधुनिक शिक्षण विधियों को अपनाना चाहिए।
हालांकि, वह एआई जैसे उपकरणों पर पूरी तरह से निर्भरता को हतोत्साहित करती हैं, इसके बजाय अपने छात्रों को रचनात्मकता को बेहतर बनाने के लिए उनका लाभ उठाने के तरीके के बारे में मार्गदर्शन करती हैं।
प्रेमन का कहना है कि छात्रों की मौलिकता को बाधित किए बिना एआई को सीखने की प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ती है, छात्रों को आधुनिक शिक्षण विधियों को अपनाना चाहिए। हम एआई पर पूरी तरह से निर्भर होने को प्रोत्साहित नहीं करते हैं, लेकिन छात्रों को विभिन्न प्रारूपों और कौशलों की अपनी समझ को बेहतर बनाने के लिए इन उपकरणों का उपयोग करने के तरीके के बारे में उनका मार्गदर्शन करते हैं।’’
रोहिणी स्थित सॉवरेन स्कूल भी अपने असाइनमेंट को पूरा करने के लिए एआई का उपयोग करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।
स्कूल के अध्यक्ष आरएन जिंदल के अनुसार, ‘‘शिक्षकों को एआई से किए गए कार्य की पहचान करने और यदि आवश्यक हो, तो छात्रों से स्कूल में अपना काम फिर से करने के लिए कहने का निर्देश दिया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम छात्रों के लिए एआई उपकरणों के उपयोग की सलाह नहीं देते हैं। हालांकि, अगर भविष्य में पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण उन्हें शामिल करना आवश्यक हो जाता है, तो हम अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकते हैं।’’
दिल्ली प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एमएस रावत ने छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए एआई साक्षरता के महत्व पर जोर दिया।
रावत के अनुसार, ‘‘वर्तमान पीढ़ी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है, इसलिए उन्हें एआई के उपयोग और परिणामों दोनों को समझना चाहिए।’’
पिछले साल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच वर्षों के लिए 10,372 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ ‘इंडियाएआई’ मिशन को मंजूरी दी थी। स्वीकृत कोष का उपयोग एक बड़े कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे को बनाने के लिए किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी ने मंगलवार को पेरिस में एआई एक्शन समिट में भाग लिया और इसे दुनिया के नेताओं, नीति निर्माताओं, विचारकों, नवप्रवर्तकों और युवाओं को एआई के बारे में सार्थक बातचीत करने के लिए एक सराहनीय प्रयास बताया।
भाषा वैभव