पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, चार अन्य की जमानत याचिका खारिज
धीरज माधव
- 24 Dec 2024, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
कोलकाता, 24 दिसंबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विद्यालयों में भर्ती में कथित अनियमितताओं से संबंधित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के एक मामले में मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और चार अन्य पूर्व अधिकारियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती ने चटर्जी के अलावा, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के पूर्व अध्यक्ष सुबीरेश भट्टाचार्य, राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली, कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष एस. पी. साहा और एसएससी के पूर्व सचिव अशोक साहा की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
इससे पहले, न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे की खंडपीठ ने पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अलग-अलग फैसले सुनाए थे।
न्यायमूर्ति बनर्जी ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली, जबकि न्यायमूर्ति सिन्हा रे ने इसे खारिज कर दिया।
इसके बाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने मामले को निर्णय के लिए न्यायमूर्ति चक्रवर्ती की एकल पीठ को भेज दिया।
न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने अपने फैसले में न्यायमूर्ति सिन्हा रे के आदेश से सहमति जताते हुए सभी पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और अगर साबित हो जाते हैं तो इससे राज्य की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है।
न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने रेखांकित किया कि अभियोजन की मंजूरी देने में देरी को लेकर राज्य की ओर से स्पष्टीकरण न दिया गया जबकि राज्यपाल ने डॉ. पार्थ चटर्जी के मामले में पहले ही मंजूरी दे दी थी।
उन्होंने टिप्पणी की कि अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का इंतजार करते हुए उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्णय के लिए समबद्ध रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने कहा कि बार-बार आदेश देने के बावजूद, अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘यह राज्य का दायित्व है कि वह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करे, सहयोग सुनिश्चित करे ताकि सच्चाई सामने आए।’’
आरोपियों की जमानत अर्जी पर उनका पक्ष रखते हुए वकीलों ने दलील दी कि मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है जबकि उनके मुवक्किल दो साल से जेल में हैं।
सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि कथित स्कूल भर्ती घोटाले में पांचों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन भर्तियों में अनियमितताओं की समग्र जांच अभी जारी है।
केंद्रीय एजेंसी के वकील ने दावा किया कि इस स्तर पर उन्हें जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली हैं।
चटर्जी ने 2011 से 2021 तक शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाला था। उन्होंने उन अन्य पूर्व अधिकारियों के साथ उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी, जो स्कूलों में भर्तियों में अनियमितता मामले में लगभग दो साल से जेल में हैं।
भाषा धीरज