जाकिर भाई पिता समान होने के साथ एक दोस्त और भाई थे : तौफीक कुरैशी
रवि कांत दिलीप
- 17 Dec 2024, 07:31 PM
- Updated: 07:31 PM
(मनीष सैन)
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) संगीतकार तौफीक कुरैशी का कहना है कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा संगीत कार्यक्रम था, जो हमेशा के लिए यादगार बन गया और उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ- जब उन्हें अपने महान पिता अल्ला रक्खा और भाई जाकिर हुसैन के साथ प्रस्तुति देने का मौका मिला।
कुरैशी ने अपने बड़े भाई जाकिर हुसैन के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए कहा कि यह घटना जर्मनी में 80 के दशक के अंत की बात है।
तौफीक कुरैशी ने मुंबई से 'पीटीआई-भाषा' के साथ फोन पर बातचीत में कहा, ‘‘इन दोनों दिग्गजों के साथ प्रस्तुति देना कुछ ऐसा था, जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भूलूंगा।’’
प्रसिद्ध तबला वादक जाकिर हुसैन का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने सोमवार को यह जानकारी दी। परिवार ने एक बयान में कहा कि हुसैन की मृत्यु फेफड़े संबंधी समस्या ‘‘इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस’’ से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई। वह 73 वर्ष के थे।
जाकिर अपने भाई कुरैशी से 12 साल बड़े थे। जाकिर हुसैन ने अपने लंबे करियर में प्रतिष्ठित ग्रैमी समेत कई पुरस्कार जीते थे।
हर युवा शास्त्रीय संगीतकार की तरह कुरैशी को भी संगीत कार्यक्रम के अंतिम 10 मिनट ही अपनी प्रस्तुति देने का मौका मिलता था। लेकिन, जर्मनी का वह संगीत कार्यक्रम अलग था।
कुरैशी ने उस कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ मेरे लिए निश्चित रूप से उनके साथ मंच साझा करना एक महान क्षण था... लेकिन शुरुआत से लेकर अंत तक वहां रहना भी एक बड़ी बात थी। यह मेरे करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि मैं अपनी सभी रचनाओं को बहुत ही आराम से बजा सकता था, बजाय इसके कि मैं अंतिम 10 मिनट में आकर सब कुछ तेजी से बजाने की कोशिश करूं। ’’
कुरैशी ने 'रिधुन 2000' जैसी एल्बमों की रचना की है और 'देवदास' तथा 'धूम 2' जैसी फिल्मों के संगीत में योगदान दिया है।
कुरैशी ने अपने बड़े भाई को याद करते हुए कहा, ‘‘वह हमेशा से ही सभी युवा कलाकारों को बहुत प्रोत्साहित करते रहे। वास्तव में, वह कभी भी यह एहसास नहीं होने देते कि हम किसी दिग्गज के साथ मंच पर हैं। वह हमेशा खुद को हमारे स्तर पर ले आते थे, ताकि अगर हममें कोई खामियां या दोष हों तो वे छिप जाएं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बड़े होते हुए, मैंने उन्हें एक पिता के रूप में देखा। उनके साथ हमेशा एक पिता, एक भाई और एक दोस्त जैसा रिश्ता रहा।’’
हुसैन का अमेरिका के कैलिफोर्निया में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके परिवार के सदस्य और भारत में उनके मित्र 27 दिसंबर को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में उनके लिये एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
भाषा रवि कांत