पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल को मिला संयुक्त राष्ट्र का शीर्ष पर्यावरण सम्मान
धीरज सिम्मी
- 10 Dec 2024, 06:27 PM
- Updated: 06:27 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र ने पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल को वैश्विक जैव विविधता के केंद्र पश्चिमी घाट में उनके मौलिक कार्य के लिए वार्षिक ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से मंगलवार को सम्मानित किया। यह संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है।
इस वर्ष सम्मानित होने वालों की सूची में गाडगिल एकमात्र भारतीय हैं। उन्होंने भारत के पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र पर जनसंख्या दबाव, जलवायु परिवर्तन और विकास गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए सरकार द्वारा गठित पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता की थी।
समिति ने 2011 में सिफारिश की थी कि पूरी पहाड़ी श्रृंखला को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित किया जाए तथा पर्यावरणीय संवेदनशीलता के आधार पर क्षेत्र को तीन श्रेणियों (ईएसजेड एक, दो और तीन) में विभाजित किया जाए।
गाडगिल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार में कहा कि उन्हें खुशी है कि वह सही बात के पक्ष में खड़े हुए।
प्रकृति वैज्ञानी 82 वर्षीय गाडगिल ने कहा, ‘‘ऐसे बहुत कम लोग हैं जो पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति की आधिकारिक रिपोर्ट की तरह ऐसी ईमानदार रिपोर्ट लिखेंगे, जो बहुत ठोस तथ्य प्रदान करती हो और एक स्पष्ट तस्वीर सामने लाती हो। यह लोगों के लिए उपलब्ध है ताकि वे इसे देख सकें, मुद्दों को समझ सकें और कम से कम कुछ अच्छी, ईमानदार चर्चा में शामिल हो सकें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात को लेकर निश्चित रूप से खुश हो सकता हूं कि मैं खड़ा हुआ और मैंने ऐसी रिपोर्ट लिखी जिसे कोई नहीं लिखता।’’
गाडगिल ने कहा कि जब वह रिपोर्ट लिख रहे थे, तब भी कई लोगों ने उन्हें ‘‘इतना ईमानदार’’ होने से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि इससे शासक वर्ग नाखुश हो जाता।
उन्होंने उस समय को याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने कहा, ‘देखिए, मैं भारत का नागरिक हूं और मुझे भारत के नागरिक के तौर पर पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट लिखने के लिए कहा गया है और मैं ऐसी सिफारिशें करूंगा जो पूरी तरह से हमारे संविधान और जमीनी तथ्यों के अनुरूप होंगी।’’
गाडगिल ने कहा कि सूचना तक पहुंच के मामले में संपन्न और वंचितों के बीच का अंतर कम हो रहा है और उनके द्वारा लिखी गई रिपोर्ट अब बहुत से लोगों के लिए सुलभ है।
यूनेस्को ने जुलाई 2012 में पश्चिमी घाट को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया और 2013 में केंद्र ने क्षेत्र के पारिस्थितिक संरक्षण और सतत विकास के लिए उपाय सुझाने हेतु रॉकेट वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कार्य समूह का गठन किया।
भाषा धीरज