राज्यों के मुख्य सचिवों को इंटरनेट बंद करने पर न्यायालय के कानून का पालन करने के लिए कहा: केंद्र
सुरेश पवनेश
- 10 Dec 2024, 06:20 PM
- Updated: 06:20 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) केंद्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि उसने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखे हैं और इंटरनेट को प्रतिबंधित किये जाने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के निर्धारित कानून का पालन करने को कहा है।
केंद्र ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ को इंटरनेट बंद किये जाने को लेकर ‘अनुराधा भसीन मामले’ में शीर्ष अदालत के फैसले से अवगत कराया।
सर्वोच्च न्यायालय ने ‘अनुराधा भसीन बनाम भारत सरकार’ मामले में फैसला सुनाया था कि इंटरनेट सेवाओं पर अपरिभाषित प्रतिबंध अवैध है और इंटरनेट प्रतिबंध आदेश को आवश्यकता और आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।
पीठ के समक्ष मंगलवार को सूचीबद्ध याचिका में परीक्षाओं में नकल रोकने के कारण कुछ राज्यों में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का आरोप लगाया गया।
केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा, ‘‘हमने मुख्य सचिवों को विशेष पत्र जारी किए हैं कि अनुराधा भसीन मामले में एक फैसला दिया गया है, जो (इससे संबंधित) कानून निर्धारित करता है, कृपया उस कानून का पालन करें। कृपया सुनिश्चित करें कि इसका इस्तेमाल विधायी मापदंडों के बाहर न किया जाए।’’
वकील ने कहा कि केंद्र ने मामले में अपना जवाबी हलफनामा दायर किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह बहुत ही दिलचस्प मामला है, जहां परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा इंटरनेट सेवाएं प्रतिबंधित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नकल रोकने के कई अन्य तरीके भी हैं, और इस तरह से इंटरनेट सेवा को प्रतिबंधित करने से ‘डिजिटल इंडिया’ में आर्थिक गतिविधि प्रभावित होती हैं।’’
ग्रोवर ने कहा कि ‘अनुराधा भसीन मामले’ के फैसले में स्पष्टतया संवैधानिक रूप से स्वीकार्य क्षेत्रों को निर्धारित किया गया है, जहां इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
केंद्र के वकील ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सरकार की ओर से मामले में पेश होंगे।
पीठ ने सुनवाई 29 जनवरी को तय की और कहा कि संबंधित पक्ष इस बीच अतिरिक्त दस्तावेज और हलफनामे दाखिल कर सकते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने नौ सितंबर, 2022 को याचिका पर सुनवाई करते हुए संचार मंत्रालय को नोटिस जारी किया और उसे एक हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें यह उल्लेख करने को कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत के संबंध में कोई मानक प्रोटोकॉल था या नहीं और यदि हां, तो किस हद तक और कैसे प्रोटोकॉल का पालन और कार्यान्वयन किया गया।
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