अमेरिका ने भारत विरोधी एजेंडे का समर्थन करने के भाजपा के आरोपों से इनकार किया
नेत्रपाल रंजन
- 07 Dec 2024, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, सात दिसंबर (भाषा) अमेरिका ने शनिवार को भाजपा के इन आरोपों को खारिज किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कारोबारी गौतम अदाणी पर लक्षित हमलों के माध्यम से भारत को अस्थिर करने के प्रयासों के पीछे अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा वित्त पोषित संगठनों और वाशिंगटन की सरकारी संस्थाओं में शामिल तत्वों का हाथ है।
अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने आरोपों को ‘‘निराशाजनक’’ बताया और कहा कि अमेरिका सरकार दुनिया भर में मीडिया की स्वतंत्रता की पैरोकार रही है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि अमेरिका की सरकारी संस्थाओं में शामिल तत्वों ने भारत की छवि को ‘‘नुकसान’’ पहुंचाने के लिए मीडिया पोर्टल ओसीसीआरपी (ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मिलीभगत की।
भाजपा ने अदाणी समूह पर हमला करने और सरकार के साथ उसकी निकटता का आरोप लगाने के लिए गांधी द्वारा ओसीसीआरपी की रिपोर्ट का उपयोग किए जाने का हवाला दिया था।
अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह निराशाजनक है कि भारत में सत्तारूढ़ पार्टी इस तरह के आरोप लगा रही है।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘अमेरिका सरकार स्वतंत्र संगठनों के साथ काम करती है जो पत्रकारों के लिए पेशेवर विकास और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का समर्थन करती है। यह कार्यक्रम इन संगठनों के संपादकीय निर्णयों या दिशा को प्रभावित नहीं करता है।’’
ओसीसीआरपी का मुख्यालय एम्स्टर्डम में है। यह एक मीडिया मंच है जो मुख्यत: अपराध और भ्रष्टाचार से संबंधित कहानियों पर ध्यान केंद्रित करता है।
भाजपा ने एक फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया था और कहा था कि इससे पता चलता है कि ओसीसीआरपी को जॉर्ज सोरोस और रॉकफेलर फाउंडेशन जैसे अमेरिकी सरकारी संस्थाओं में शामिल तत्वों के साथ-साथ अमेरिकी विदेश विभाग के यूएसएड द्वारा वित्तपोषित किया जाता है।
अमेरिकी दूतावास के अधिकारी ने कहा, ‘‘अमेरिका लंबे समय से दुनिया भर में मीडिया की स्वतंत्रता का पैरोकार रहा है। स्वतंत्र प्रेस किसी भी लोकतंत्र का एक अनिवार्य घटक है, जो सुविज्ञ और रचनात्मक बहस को सक्षम बनाने के साथ ही सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाती है।’’
पिछले महीने, अमेरिकी अभियोजकों ने 62 वर्षीय गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर और अन्य प्रतिवादियों पर 2020 और 2024 के बीच भारत सरकार के अधिकारियों को उन शर्तों पर सौर ऊर्जा अनुबंध प्राप्त के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की रिश्वत देने का आरोप लगाया था जिनसे संभावित रूप से दो अरब डॉलर से अधिक का लाभ मिल सकता था।
आरोपों के बाद कांग्रेस ने गहन जांच की मांग की और सरकार पर अदाणी को बचाने का आरोप लगाया।
अदाणी समूह ने आरोपों को ‘‘निराधार’’ बताते हुए खारिज किया है।
भाषा नेत्रपाल