देहरादून में मादक पदार्थ बनाने वाली एक फैक्टरी का भंडाफोड़, तीन लोग गिरफ्तार
दीप्ति, रवि कांत
- 06 Dec 2024, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
देहरादून, छह दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड के देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र में हर्बल उत्पाद बनाने वाली फैक्टरी की आड़ में मादक पदार्थ का निर्माण करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को इस सिलसिले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने यहां बताया कि गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस, औषधि विभाग और मादक पदार्थ निरोधक कार्य बल (एएनटीएफ) द्वारा लांघा रोड पर स्थित ग्रीन हर्बल कंपनी पर संयुक्त कार्रवाई की गयी जिसमें आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में मादक पदार्थ तथा सिरप बरामद हुए।
पुलिस ने बताया कि मौके से फैक्टरी के मालिक संजय कुमार तथा उसके दो साझेदारों-शिवकुमार तथा रहमान को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ में दो अन्य आरोपियों-ऋषभ जैन व कन्हैया लाल के भी मादक पदार्थों के निर्माण में शामिल होने की जानकारी मिली है जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं।
पूछताछ में संजय ने बताया कि वह पहले सेलाकुई क्षेत्र में एक फैक्टरी में काम करता था जिसके मालिक उस्मान द्वारा उक्त फैक्टरी में अवैध रूप से मादक पदार्थ बनाए जाते थे और यहां से उसे भी इन पदार्थों की मांग और आपूर्ति के बारे में पता चल गया।
उसने बताया कि तीन वर्ष पूर्व जब उस्मान को पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, उसके बाद संजय ने 2023 में ग्रीन हर्बल कंपनी के नाम से फूड लाइसेंस ले लिया और उसकी आड़ में मादक पदार्थ बनाने का काम करने लगा।
पुलिस ने बताया कि संजय बेहद शातिर किस्म का अपराधी है जो मांग के हिसाब से ही मादक पदार्थों का निर्माण करता था और अपने पास उनका स्टॉक नहीं रखता था।
संजय (39) और शिवकुमार (36) उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बड़गांव के रहने वाले हैं जबकि तीसरा आरोपी रहमान (38) चंदौली जिले का निवासी है।
पुलिस ने बताया कि फैक्टरी से 1921 कैप्सूल/टैबलेट, सिरप की 592 बोतलें और 342 खाली रैपर बरामद किए गए।
औषधि नियंत्रक ताजबर जग्गी ने बताया कि फैक्टरी में जिन दवाओं का निर्माण किया जा रहा था, उसके पास उनका लाइसेंस ही नहीं था।
उन्होंने बताया कि दवाइयों को जांच के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा जा रहा है जहां उनमें प्रयुक्त सॉल्ट और अन्य तत्वों का परीक्षण किया जाएगा। मादक पदार्थ बनाने के लिए प्रयुक्त उपकरण भी कब्जे में लिए गए हैं।
जग्गी ने बताया कि उक्त फैक्टरी में जो दवाइयां बनाई जा रही थीं, वे साइकोट्रॉपिक हैं जिनका अधिक सेवन व्यक्ति को नशे की हालत में ले जाता है। उन्होंने बताया कि नशे के विकल्प के रूप में ऐसी दवाइयों का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे खेल को उजागर कर दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में 862 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर उनके नमूने एकत्रित किए गए। दो कंपनियों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है और पांच कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गयी है। कुल 72 कंपनियों के उत्पादों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगायी गयी है।
प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव और खाद्य संरक्षा एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन के आयुक्त डॉ आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रदेश में नकली दवाइयों के खिलाफ छापेमारी का अभियान जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि नकली या कम गुणवत्ता वाली दवाइयां बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भाषा
दीप्ति, रवि कांत