डीजेबी कोष मामला : न्यायलय ने प्रधान सचिव वित्त को नोटिस जारी किया
धीरज माधव
- 01 Apr 2024, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की याचिका पर सोमवार को दिल्ली के प्रधान सचिव (वित्त) को नोटिस जारी किया। ‘आप’ सरकार ने आरोप लगाया कि अधिकारी विधानसभा की मंजूरी के बावजूद दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के लिए आवंटित राशि जारी नहीं कर रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दिल्ल सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने कहा,‘‘ नौकरशाह हमारी नहीं सुन रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि डीजेबी को अब भी 1,927 करोड़ रुपये दिया जाना है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि सेवा कानून में हालिया संशोधन ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां शहर के नौकरशाह मंत्रियों की बात नहीं सुनते और आदेशों का पालन नहीं कर रहे।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘ हम प्रधान सचिव (वित्त) से पूछेंगे।’’ इस पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा यह तर्क दिए जाने के बाद उप राज्यपाल (एलजी) को नोटिस जारी नहीं किया कि धन आवंटन में एलजी की भूमिका नहीं है और यह जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के वित्त विभाग की है।
शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध होने से एक दिन पहले, वित्त सचिव ने 31 मार्च को 760 करोड़ रुपये जारी किए। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस धन का उपयोग लंबित भुगमान के लिए किया गया।
दिल्ली सरकार ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में डीजेबी को कुल 4,578.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें 31 मार्च को प्राप्त 760 करोड़ रुपये शामिल हैं और 1,927 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है।
उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से पेश रोहतगी ने शीर्ष अदालत में सुनवाई का विरोध करते हुए कहा कि इसी तरह की एक याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में भी लंबित है। उन्होंने कहा कि जल बोर्ड कानूनी प्राधिकार है और उप राज्यपाल का उससे कोई लेना देना नहीं है।
रोहतगी ने तर्क दिया, ‘‘उनकी (उपराज्यपाल की) कोई भूमिका नहीं है। यह बड़ा अजीब है। याचिकाकर्ता दिल्ली सरकार की जल मंत्री हैं, जो योजना मंत्री भी हैं और जल बोर्ड की अध्यक्ष भी हैं। ये सभी पद और वित्त उनके पास हैं। असली प्रतिवादी उनाका अपना सचिव है। मुझे नहीं पता कि ये किस तरह की याचिका है।’’
सिंघवी ने जवाब दिया कि विधानसभा द्वारा अनुमोदित 1,927 करोड़ रुपये की राशि अभी भी डीजेबी को दी जानी है।
रोहतगी ने कहा कि उप राज्यपाल के पास कोई कोष नहीं है और इसे दिल्ली सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी किया जाना है।
सिंघवी ने कहा, ‘‘मेरे सचिव मेरी नहीं सुनते।’’
रोहतगी ने कहा, ‘‘ अगर आपके सचिव अपकी नहीं सुनते तो मुझे क्या करना चाहिए।’’
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच अप्रैल की तारीख तय की है।
इससे पहले 20 मार्च को अरविंद केजरीवाल सरकार ने नौकरशाही और दिल्ली की आप सरकार के बीच तनातनी के बीच शीर्ष अदालत का रुख किया था।
प्रधान न्यायाधीश ने आप सरकार को भरोसा दिया कि शीर्ष अदालत दिल्ली जल बोर्ड के लिए आवंटित तीन हजार करोड़ रुपये की राशि 31 मार्च (वित्तवर्ष का आखिरी दिन) की तारीख बीतने के बाद भी जारी करने का आदेश दे सकती है।
सिंघवी ने तर्क दिया कि बजट विधिवत विधानसभा से पारित किया गया था, फिर भी डीजेबी के लिए निर्धारित धनराशि जारी नहीं की जा रही है और इसके परिणामस्वरूप इस आवंटित राशि की समयावधि वित्तवर्ष समाप्त होने के बाद बीत जाएगी।
भाषा
धीरज