भारत, चीन के रक्षा मंत्रियों ने लाओस में की वार्ता, पारस्परिक विश्वास बहाली के लिए काम करने पर सहमत
नेत्रपाल धीरज
- 20 Nov 2024, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 20 नवंबर (भाषा) भारत और चीन ने बुधवार को पारस्परिक विश्वास एवं समझ की बहाली के लिए एक रोडमैप की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष दोंग जून के साथ वार्ता के दौरान 2020 के ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण सीमा संघर्षों’’ से सीख लेने का आह्वान किया।
दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात लाओस की राजधानी विएंतियाने में हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब कुछ सप्ताह पहले ही भारतीय और चीनी सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में दो अंतिम टकराव स्थलों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की है।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्ष पारस्परिक विश्वास और समझ की बहाली के लिए एक रोडमैप की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
इसने कहा कि प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर रियो डी जेनेरियो में बातचीत की जिसमें भारत-चीन संबंधों में ‘‘अगले कदमों’’ पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने, सीमा पार नदियों पर डेटा साझा करने, सीधी उड़ानों और मीडिया आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि विशेष प्रतिनिधियों और सचिव-उपमंत्री तंत्र की बैठक भी शीघ्र ही होगी।
सिंह ने दोंग के साथ अपनी बैठक में संघर्ष के बजाय सहयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘‘रक्षा मंत्री ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि दुनिया के दो सबसे बड़े देशों भारत और चीन के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’’
इसने कहा, ‘‘यह देखते हुए कि दोनों देश पड़ोसी हैं और बने रहेंगे, उन्होंने कहा कि हमें संघर्ष के बजाय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।’’
बयान में कहा गया कि सिंह ने 2020 में सीमा पर हुईं दुर्भाग्यपूर्ण झड़पों से सीख लेने, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने और भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने का आह्वान किया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘उन्होंने तनाव में कमी लाकर दोनों पक्षों के बीच अधिक विश्वास और भरोसा कायम करने पर जोर दिया। दोनों पक्ष पारस्परिक विश्वास और समझ की बहाली के लिए एक रोडमैप की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमत हुए।’’
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों एशियाई शक्तियों के बीच संबंधों में काफी कड़वाहट आ गई थी। यह दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य झड़प थी।
सिंह और दोंग की मुलाकात 10 देशों के आसियान समूह और इसके कुछ संवाद साझेदारों के सम्मेलन से इतर हुई।
भारतीय और चीनी सेनाओं ने पिछले महीने के अंत में पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग से सैनिकों के वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई वार्ताओं के बाद 21 अक्टूबर को समझौता हुआ था।
दोनों पक्षों ने लगभग साढ़े चार वर्ष के अंतराल के बाद दोनों क्षेत्रों में गश्त भी शुरू कर दी।
गश्त और सैनिकों की वापसी पर समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के शहर कजान में वार्ता की थी।
लगभग 50 मिनट की बैठक में मोदी ने मतभेदों और विवादों को उचित तरीके से निपटाने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द को भंग न होने देने के महत्व पर जोर दिया था।
भारत का कहना है कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हो गया था।
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) में भाग लेने के उद्देश्य से सिंह की विएंतियाने की तीन दिवसीय यात्रा बुधवार से शुरू हुई।
सिंह ने लाओस के रक्षा मंत्री जनरल चांसमोन चान्यालाथ और मलेशिया के रक्षा मंत्री दातो सेरी मोहम्मद खालिद बिन नॉर्डिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता भी की।
एडीएमएम-प्लस एक मंच है जिसमें 10 देशों का आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) और इसके आठ संवाद साझेदार - भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और अमेरिका शामिल हैं।
लाओस एडीएमएम-प्लस के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में इस बैठक की मेजबानी कर रहा है।
भाषा
नेत्रपाल