स्वदेशीकरण कार्यक्रम को गति देने की जरूरत : वायुसेना प्रमुख
धीरज माधव
- 19 Sep 2024, 09:46 PM
- Updated: 09:46 PM
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर.चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि आत्मनिर्भरता ‘अलग-थलग’ होना नहीं है बल्कि बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी आतंरिक क्षमता को मजबूत करना है।
उन्होंने जोर दिया कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘भारत शक्ति रक्षा सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आज देश अनेक प्रकार के ‘‘नये युग के खतरों’’ का सामना कर रहे हैं जो अतीत के पारंपरिक सैन्य या आर्थिक जोखिमों से अलग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ये खतरे अक्सर जटिल, अंतरराष्ट्रीय और बहुआयामी होते हैं। इसके साथ ही हाइब्रिड युद्ध का उदय हो रहा है, जिसमें पारंपरिक सैन्य आक्रामकता के साथ साइबर हमले, गलत सूचना और आर्थिक दबाव का मिश्रण हो रहा है।’’
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारत के लिए इन चुनौतियों का सामना करने का एक शक्तिशाली और प्रभावी साधन सहयोग है।
उन्होंने कहा, ‘‘उद्योग, शिक्षा जगत, साझेदार देशों और उभरते बाजारों के साथ सहयोग इन अशांत समय में बातचीत के लिए महत्वपूर्ण होगा। चूंकि भारत इन चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकियों और रक्षा क्षमताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कमजोरियां पैदा कर सकती है।’’
वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘मेरे विचार में, आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग होना नहीं है, बल्कि बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक क्षमताओं और सामर्थ्य को मजबूत करना भी है। इसमें मजबूत घरेलू उद्योगों का निर्माण, नवाचार में निवेश, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करना और बाहरी हेरफेर की कमजोरियों को कम करना शामिल है।’’
उन्होंने सिपरी की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसके मुताबिक भारत 2019-2023 के बीच दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक था जिसमें 2014-2018 की पिछली अवधि की तुलना में आयात में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा, ‘‘भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें तकनीकी नवाचार, संरचनात्मक सुधार और रणनीतिक योजना का संयोजन हो।’’
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि भारत आज की ‘अनिश्चितताओं से भरी’ दुनिया में किस प्रकार एक स्थिरताकारी शक्ति बन सकता है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘‘वीयूसीए’ दुनिया एक नए प्रतिमान का प्रतिनिधित्व करती है, अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता हर स्तर पर निर्णय लेने को आकार देगी। चाहे वह भूराजनीति हो, आधुनिक युद्ध हो या व्यवसाय, ‘वीयूसीए’ दुनिया में सफलता के लिए दक्षता, लचीलापन, सहयोग और अनिश्चितताओं को स्वीकार करने की तत्परता की आवश्यकता होगी।’’
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा था कि इस वीयूसीए (अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता) की अनिश्चितताएं वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रही हैं, विशेष रूप से गोला-बारूद की आपूर्ति श्रृंखला को।
एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा कि यह वातावरण चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह उन लोगों के लिए अवसर भी प्रदान करता है जो इसे अनुकूल बना सकते हैं। उन्होंने कर्नल जॉन बॉयड द्वारा विकसित निर्णय लेने वाले मॉडल ‘ओओडीए लूप’ का हवाला देते हुए बताया कि यह अनिश्चित दुनिया में कैसे मदद कर सकता है। ओओडीए का मतलब है निरीक्षण करना, अनुकूल करना, निर्णय लेना और कार्य करना।
वायुसेना प्रमुख ने कुछ ऐसी जरूरतों का उल्लेख किया एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें घरेलू अनुसंधान और विकास को मजबूत करना चाहिए, विशेषज्ञता में कमी को पूरा करने के वास्ते नवाचार को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए।’’
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज स्तर पर इस तरह के अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, प्रतिभाओं का दोहन और पोषण करने के लिए हमारी शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से नया रूप देने की आवश्यकता है। पिछले कुछ दशकों में हमने जो प्रतिभा पलायन देखा है, वह कम नहीं हुआ है और हमें प्रतिभा को बनाए रखने में मदद करने के लिए कौशल पेशेवरों को बेहतर प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बननी चाहिए।’’
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि दूसरा, हमें अपने रक्षा औद्योगिक आधार का विस्तार और विविधता लाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि तीसरा, हमें अपने स्वदेशी कार्यक्रम में तेजी लाने की आवश्यकता है और यह तभी हो सकता है जब हम समय और लागत में होने वाली वृद्धि को न्यूनतम करने के लिए दक्ष परियोजना प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं, जिसने ऐतिहासिक रूप से हमारे कुछ रक्षा कार्यक्रमों को प्रभावित किया है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्थापित क्षमताओं की उपेक्षा किए बिना, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि भारत भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए खुद को तैयार रखे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें रक्षा संबंधी उभरती जरूरतों को शीघ्र पूरा करने के लिए नवोन्मेषी प्रक्रियाएं विकसित करनी होंगी। हमें उद्योग और वायुसेना के बीच समन्वय स्थापित करना होगा, आजादी की 100वीं सालगिरह पर भारत के पास ऐसी वायुसेना हो, जो 25 वर्ष बाद आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।’’
रक्षा सम्मेलन में विभिन्न वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और कई देशों के रक्षा अताशे सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया। बाद में सीडीएस और थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी सम्मेलन में शामिल हुए।
भाषा धीरज