विरासत इमारतों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा: बिहार के पर्यटन मंत्री ने सुल्तान पैलेस विवाद पर कहा
माधव
- 09 May 2026, 04:04 PM
- Updated: 04:04 PM
पटना/नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) पटना में 104 साल पुरानी इमारत सुल्तान पैलेस के परिसर में प्रस्तावित पांच सितारा होटल परियोजना से जुड़े विवाद के बीच, बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि राज्य में जहां भी ''ऐसी विरासत संरचनाएं'' हैं, उनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
गुप्ता ने यह टिप्पणी शुक्रवार को पटना स्थित अपने कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान की, जब उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद राज्य के नये पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
मंत्री से पटना के ऐतिहासिक सुल्तान पैलेस के भविष्य के बारे में पूछा गया, जो पटना का एक प्रतिष्ठित वास्तुशिल्प भी है। हाल में स्थानीय मीडिया के एक वर्ग में आई खबरों में यह आशंका जताई गई थी कि प्रस्तावित पांच सितारा होटल के लिए जगह बनाने के वास्ते इस प्रसिद्ध इमारत को ढहाया जा सकता है।
इन खबरों ने कई इतिहासकारों, विद्वानों, संरक्षण वास्तुकारों और अन्य धरोहर प्रेमियों तथा विरासत संरक्षण पर काम करने वाले नागरिक संस्थाओं के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है, जिन्होंने बिहार सरकार से मांग की है कि ''पटना के रत्न'' को संरक्षित किया जाए और इसे विरासत होटल परियोजना का हिस्सा बनाया जाए, जैसा कि मूल रूप से परिकल्पना की गई थी, और जिसे 2017 में सार्वजनिक किया गया था।
बिहार मंत्रिमंडल ने 10 सितंबर 2024 को, पटना के मध्य में स्थित प्रतिष्ठित सुल्तान पैलेस के स्थल पर सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत पांच सितारा हेरिटेज होटल के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसमें इसकी एक सदी से अधिक पुरानी ऐतिहासिक संरचना को संरक्षित रखे जाने की बात कही गई तथा परियोजना के लिए इसे ध्वस्त करने के 2022 के अपने पूर्व निर्णय को पलट दिया गया था।
मंत्री से इस संबंध में पूछे जाने पर कि सुल्तान पैलेस की पुरानी इमारत का क्या होगा क्योंकि इसे ध्वस्त किये जा सकने की कुछ खबरों में फिर से आशंका जताई गई है, उन्होंने कहा कि देश में कई विरासत भवनों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया गया है या किया जा रहा है ताकि पर्यटक सांस्कृतिक विरासत की सराहना कर सकें।
गुप्ता ने राज्य पर्यटन सचिव और पर्यटन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कहा, ''बिहार में जहां भी इस तरह के पुराने होटल (भवन) या ऐतिहासिक इमारतें हैं, हम उन सभी का सौंदर्यीकरण करेंगे।''
हालांकि, उन्होंने इस संबंध में विस्तार से कुछ नहीं कहा।
पटना से प्रकाशित होने वाले एक प्रमुख हिंदी दैनिक में 16 अप्रैल को सुल्तान पैलेस परियोजना से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद बिहार पर्यटन मंत्रालय की ओर से यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है। इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने पर विवाद खड़ा हो गया था।
विश्व विरासत दिवस (18 अप्रैल) से कुछ दिन पहले प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राज्य सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली एक ''समिति'' ने ''पाया'' है कि सुल्तान पैलेस - जिसे 1922 में प्रख्यात वकील सर सुल्तान अहमद ने अपने निवास के रूप में बनवाया था - विरासत भवन के रूप में सूचीबद्ध नहीं है।
पर्यटन मंत्री की शुक्रवार की संक्षिप्त टिप्पणी ने ऐतिहासिक इमारत के भविष्य को लेकर चिंतित नागरिकों की आशंकाओं को कुछ हद तक कम कर दिया है।
भाषा सुभाष माधव
माधव
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