''आर जी कर घटना से ध्यान भटकाने के लिए तृणमूल सरकार ने नया बलात्कार रोधी विधेयक पेश किया''
खारी मनीषा पवनेश
- 03 Sep 2024, 04:14 PM
- Updated: 04:14 PM
(तस्वीर सहित)
कोलकाता, तीन सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक चिकित्सक की हत्या को लेकर जनता के गुस्से और विरोध से ध्यान भटकाने के लिए नया बलात्कार रोधी विधेयक पेश किया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने कहा, ‘‘हम नए विधेयक का पूरा समर्थन करेंगे और इस पर वोटिंग की मांग नहीं करेंगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के दौरान महिलाओं से दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाओं को रोकने में विफल रही।
अधिकारी ने विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकार से इसे तुरंत लागू करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में यौन शोषण और दुष्कर्म के संबंध में मीडिया की खबरों का हवाला दिया और आरोप लगाया कि इनमें से किसी भी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच नहीं संभाली, फिर भी राज्य की जांच एजेंसियां दोषियों को गिरफ्तार करने और उन्हें कड़ी सजा दिलाने में ‘‘विफल’’ रहीं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि विधेयक पारित होने के बाद इसे तत्काल लागू किया जाए। मैं मांग करता हूं कि मेरे द्वारा सुझाए गए संशोधनों जिनमें शिकायत पर कार्रवाई करने में किसी भी विफलता के लिए संबंधित पुलिस थाने के खिलाफ कार्रवाई करना और जांच में विफलता साबित होने पर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की मेरी सिफारिश को विधेयक में शामिल किया जाना चाहिए।’’
विधानसभा अध्यक्ष बिमन बंद्योपाध्याय ने कहा कि अधिकारी द्वारा मीडिया की खबरों में पिछली घटनाओं का किया गया उल्लेख और मुख्यमंत्री से संबंधित भाजपा की अन्य मांग को सदन के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पिछले माह एक सरकारी अस्पताल में एक चिकित्सक की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहीं, क्योंकि उनकी सरकार पिछली घटनाओं के दोषियों के खिलाफ दंडनीय कार्रवाई नहीं कर सकी।’’
अधिकारी ने कुछ संशोधनों को पढ़ते हुए कहा कि पीड़ितों या उनके परिजनों की प्राथमिकी दर्ज न करने पर संबंधित पुलिस थाने के अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए, वैधानिक चिकित्सा परीक्षण या पोस्टमार्टम न करने तथा साक्ष्य नष्ट करने को लेकर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए। लेकिन कानून मंत्री मलय घटक द्वारा कानूनी पहलुओं का हवाला दिए जाने के कारण इन संशोधनों पर वोटिंग नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कानूनी विशेषज्ञों से सिफारिशों की समीक्षा कराएगा।
भाषा खारी मनीषा