चेन्नई का मरीना बीच स्वच्छ और स्वास्थ्यकर शौचालयों के साथ आगंतुकों को कर रहा आकर्षित
नोमान माधव
- 29 Aug 2024, 05:17 PM
- Updated: 05:17 PM
चेन्नई, 29 अगस्त (भाषा) चेन्नई के लोगों के लिए मरीना बीच और उसका विशाल लाइटहाउस लंबे समय से शाम को घूमने की पसंदीदा जगह रहा है, लेकिन गंदे सार्वजनिक शौचालयों से आने वाली बदबू की वजह से यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। मगर अब यह अतीत की बात हो गई है।
मद्रास विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालयों और यहां तक कि सचिवालय से सटा विशाल क्षेत्र ग्रेटर चेन्नई निगम की पहल ‘सिंगारा’ (आकर्षक) चेन्नई 2.0 अभियान के तहत सुलभ, स्वच्छ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने की एक नयी गाथा लिख रहा है। परियोजना के तहत निगम ने डीआरआरएसबी पीसीटी वन प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया जिसने‘डिजाइन बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत शौचालय बनाए।
डीआरआरएसबी पीसीटी वन प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी माइकल जेम्स ने कहा, “ चाहे रविवार हो या राष्ट्रीय अवकाश, सार्वजनिक शौचालयों को कभी भी बंद नहीं रखा जा सकता। उन्हें चौबीसों घंटे चालू रखना होता है और हम लोगों की लिए सुविधा सुनिश्चित करके ‘सिंगारा चेन्नई’ अभियान की भावना को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”
ये निःशुल्क शौचालय हैं जिनमें 3,000 से अधिक शौचालय सीट लगी हैं। इनकी छत कांच से बनी हैं तथा इनका रखरखाव भी अच्छी तरह से किया गया है। पुरुषों, महिलाओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। महिलाओं के शौचालय में माताओं के लिए एक ‘फीडिंग रूम’ और नैपकिन के निपटान के लिए एक अलग कूड़ेदान है। सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाने की भी योजना है।
इस परियोजना का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय युवाओं, खासकर अन्नाई सत्य नगर की झुग्गी-झोपड़ियों के युवाओं के व्यवहार में बदलाव लाना था। यह शायद सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है जिसकी आबादी करीब 5,000 है। पहले इस इलाके में शौचालय की कोई उचित सुविधा नहीं थी और खुले में शौच के कारण लोग समुद्र तट के कुछ हिस्सों पर नहीं जा पाते थे।
माइकल ने कहा, “हमने इलाके में वॉलीबॉल का मैदान तैयार किया और इससे युवाओं को शौचालय निर्माण परियोजना को पटरी से उतारने वाली गतिविधियों से दूर रखा गया। उन्होंने रुचि दिखानी शुरू कर दी और मैदान में खेलना शुरू कर दिया। हमने खिलाड़ियों के लिए चारों ओर बाड़ भी लगा दी।”
डीआरआरएसबी ने वर्तमान में झुग्गी-झोपड़ियों के 350 से अधिक निवासियों को सफाईकर्मी के रूप में नियुक्त किया है। इससे उनके लिए स्थिर मासिक आय और सम्मान सुनिश्चित हुआ है। साथ ही, इससे अन्य निवासियों को शौचालय साफ रखने की प्रेरणा भी मिली है।
चेन्नई शौचालय परियोजना पर काम सितंबर 2023 में शुरू हुआ, जिसमें निगम क्षेत्र पांच, छह और नौ (केवल मरीना क्षेत्र) को शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य इन क्षेत्रों में 3,270 शौचालय सीट उपलब्ध कराना था।
ढाई हजार से ज़्यादा शौचालय सीट की मरम्मत, नवीनीकरण या ज़रूरत के हिसाब से पुनर्निर्माण किया गया। तीनों ज़ोन में 662 अतिरिक्त शौचालय सीट के निर्माण के लिए 90 स्थानों की पहचान की गई है और उनमें से 300 का निर्माण पूरा हो चुका है और बाकी शौचालय सीट के निर्माण का काम किया जा रहा है।
बेहतर ‘वेंटिलेशन’ और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी और ग्रीन काउंसिल जैसी संस्थाओं के सलाह-मशविरे से नया निर्माण कार्य किया गया।
“चेन्नई शौचालय” पहल ने सफाईकर्मियों और आम जनता दोनों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार किया है। ठेकेदार ने समय पर रखरखाव और सफाई सुनिश्चित करने के लिए दो पालियों में प्रतिक्रिया टीम नियुक्त की है, जिसके साथ उन्नत उपकरणों से लैस एक गहन सफाई टीम भी है।
एक समर्पित कॉल सेंटर भी है जो प्रतिक्रिया, शिकायतों और सुझावों का प्रबंधन करता है, जबकि सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) स्थानीय समुदाय को पहल का समर्थन करने के लिए शिक्षित करता है।
सफाई कर्मचारी पहले असंगठित व्यवस्था के तहत काम करते थे, लेकिन वे अब नियमित वेतन, बीमा और बच्चों की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं।
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नोमान