वायुसेना ने युवाओं को प्रेरित करने के लिए वीरतापूर्ण कहानियों पर आधारित कॉमिक्स का विमोचन किया
आशीष पवनेश
- 28 Aug 2024, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) भारतीय वायुसेना ने बुधवार को एक कॉमिक्स का विमोचन किया जिसमें वायुसेना मार्शल अर्जन सिंह और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान बोयरा की लड़ाई का वर्णन है।
इस चित्रकथा का उद्देश्य युवाओं को वायुसेना के गौरवशाली इतिहास के बारे में शिक्षित करना और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने यहां वायु भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘हीरोज ऑफ द इंडियन एयर फोर्स-वॉल्यूम-I’ नामक कॉमिक्स का विमोचन किया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा अभियान में लड़ाई लड़ने वाले और 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान मोर्चा संभालने वाले अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना के मार्शल रैंक से सम्मानित अधिकारी थे और उन्होंने स्वतंत्रता से पहले विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) भी अर्जित किया था।
पिछले वर्ष परिकल्पित इस परियोजना का नेतृत्व एयर चीफ मार्शल चौधरी के दृष्टिकोण के तहत भारतीय वायुसेना के दिशा (डाईरेक्टरेट ऑफ इंडक्शन एंड सलैक्शन इन होलिस्टिक अप्रोच) प्रकोष्ठ द्वारा किया गया।
कॉमिक्स जारी करने के कार्यक्रम में प्रसारित वीडियो के अनुसार, चित्रकथा के जरिये युवाओं विशेषकर स्कूली बच्चों तक पहुंचने तथा उन्हें भारतीय वायुसेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने को लेकर यह माध्यम चुना गया।
पहले खंड में दो कहानियां हैं। ‘फाइंड योर कॉलिंग’ में अर्जन सिंह नामक लड़के की कहानी है जो भारतीय वायुसेना का पहला मार्शल बना। वहीं, ‘बैटल ऑफ बोयरा’ 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना की रोमांचक कहानी बताती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आकर्षक चित्रों के साथ इन कहानियों का उद्देश्य बच्चों में साहस, प्रेरणा और दृढ़ता के मूल्यों के प्रति बेहतर समझ पैदा करना तथा उन्हें उनके पदचिह्नों पर चलना सिखाना है।
दूसरी कहानी में पायलट की नजर से युद्ध का वर्णन है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हवाई युद्ध मुकाबला नंबर 22 स्क्वाड्रन, स्विफ्ट्स के युवा पायलटों की युद्ध कौशल और वीरता का एक महत्वपूर्ण मुकाबला था, जिसने स्क्वाड्रन को सेबर स्लेयर्स का नाम दिलाया।’’
वायुसेना के अधिकारी ने बताया कि कॉमिक्स का उद्देश्य युवा पाठकों को शिक्षित करना और हवाई युद्ध में दिखाई गई वीरता को दर्शाना है। अधिकारी ने बताया कि पुस्तक का पीडीएफ संस्करण ऑनलाइन जारी किया जाएगा तथा यह सोशल मीडिया पर ‘‘निशुल्क साझा’’ के लिए उपलब्ध होगा।
वायुसेना इतिहास प्रकोष्ठ और वायु सेना संग्रहालय ने ऐतिहासिक तथ्यों को उपलब्ध कराने और उनकी पड़ताल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि भारतीय वायुसेना के समारोह निदेशालय ने यह सुनिश्चित किया कि कहानियों में वर्णित काल के अनुसार वर्दी का सही चित्रण किया जाए।
भाषा आशीष