भारत का प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग 23,000 करोड़ रुपये के पार, महाराष्ट्र शीर्ष पर: रिपोर्ट
रमण
- 15 May 2026, 05:11 PM
- Updated: 05:11 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) भारतीय प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग का कारोबार वित्त वर्ष 2024-25 में सालाना आधार पर चार प्रतिशत बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 23,021 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र कुल बिक्री में 15.3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा। उद्योग संगठन इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
आईडीएसए की 'डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री 2025 आउटलुक' नाम से जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में उद्योग का कारोबार 22,142 करोड़ रुपये था।
यह अध्ययन बाजार शोध कंपनी इप्सोस ने किया है। इसे बुधवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में सांसद और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने जारी किया।
खंडेलवाल ने कहा कि देश 'विकसित भारत' की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी जो उद्यमिता, स्वरोजगार और समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग को सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग ने पिछले छह वर्षों में 6.5 प्रतिशत की संचयी वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है। उद्योग का कारोबार वित्त वर्ष 2019-20 के लगभग 16,800 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 23,021 करोड़ रुपये हो गया।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, कुल बिक्री में उत्तरी क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 27.58 प्रतिशत रही। इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र की हिस्सेदारी 25.47 प्रतिशत, पूर्वी क्षेत्र की 22.47 प्रतिशत, दक्षिणी क्षेत्र की 17.81 प्रतिशत और पूर्वोत्तर क्षेत्र की 6.67 प्रतिशत रही।
राज्यों में महाराष्ट्र 15.31 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद क्रमश: पश्चिम बंगाल (10.88 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (8.82 प्रतिशत), कर्नाटक (6.37 प्रतिशत) और बिहार (5.61) प्रतिशत का स्थान रहा।
रिपोर्ट में कहा गया कि स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी उत्पादों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में करीब 60 प्रतिशत रही। सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तथा घरेलू उपयोग के उत्पादों की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत रही। इन तीन श्रेणियों की कुल हिस्सेदारी उद्योग की कुल बिक्री में 91 प्रतिशत से अधिक रही।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष बिक्री से जुड़े सक्रिय विक्रेताओं की संख्या बढ़कर 93.2 लाख हो गई, जो 2023-24 में 88 लाख थी। कुल प्रत्यक्ष विक्रेताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 48 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष 44 प्रतिशत थी।
आईडीएसए के चेयरमैन रत्नेश लाल ने कहा, "रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत के प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग की बढ़ती मजबूती को दर्शाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, नए उद्यमियों की रुचि और खुदरा उद्यमिता के बढ़ते अवसर इस क्षेत्र की समावेशी आर्थिक विकास को गति देने की क्षमता को दिखाते हैं।''
उन्होंने कहा, ''पिछले छह वर्षों में उद्योग की 6.5 प्रतिशत की निरंतर संचयी वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) अनुकूल नियामकीय ढांचे और प्रत्यक्ष बिक्री क्षेत्र में बढ़ते उपभोक्ता विश्वास का प्रमाण है।"
भाषा
योगेश रमण
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