फोरेंसिक विज्ञान सच्चाई एवं इंसाफ का है आधारस्तंभ : उपराष्ट्रपति धनखड़
राजकुमार शफीक
- 23 Aug 2024, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
(फोटो के साथ)
गांधीनगर, 23 अगस्त (भाषा) फोरेंसिक विज्ञानियों से आतंकवाद और संगठित अपराधों का मुकाबला करने तथा पर्यावरण क्षरण एवं साइबर अपराधों को रोकने के लिए अपने कौशल का इस्तेमाल करने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि फोरेंसिक विज्ञान न केवल तकनीकी क्षेत्र है बल्कि यह सच्चाई एवं इंसाफ का आधारस्तंभ भी है।
धनखड़ ने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान सुनिश्चित करता है कि अपराधियों को इंसाफ के कठघरे तक पहुंचाया जाए और इससे भी अधिक बड़ी बात है कि यह बेगुनाही भी साबित करने में मदद करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जो समाज किसी निर्दोष की पुकार नहीं सुन सकता, वह समाज पतन की दहलीज पर पहुंच जाता है।’’
धनखड़ ने ‘नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू)’ में विशेष व्याख्यान के दौरान भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के पारित होने की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘इसने हमें हमारी क्रूर औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति दिलायी है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हम (तीन आपराधिक कानूनों के पारित होने के साथ) औपनिवेशिक विरासत से मुक्त हो गए, हमने अपनी स्वतंत्रता को परखा है। ‘दंड विधान’ अब ‘न्याय विधान’ बन गया। यह सिर्फ एक बदलाव नहीं है, बल्कि एक बड़ा बदलाव, एक बहुत जरूरी बदलाव है, जिसने हमें उस क्रूर औपनिवेशिक विरासत से मुक्त कर दिया जहां कानून का निर्धारण कारक यह था कि जनता से सख्ती से कैसे निपटा जाए।’’
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की अपराध न्याय प्रणाली उसके लोकतंत्र को परिभाषित करती है क्योंकि इसका हमारी आजादी से सीधा संबंध है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अपराध विज्ञान न केवल एक तकनीकी क्षेत्र है बल्कि यह सच्चाई एवं इंसाफ का आधारस्तंभ भी है।
धनखड़ ने कहा कि जो लोग अपराध विज्ञान के क्षेत्र में हैं, उनके कार्य ही ‘‘बेगुनाह लोगों के लिए अंतिम शरणस्थली है और आप उस व्यक्ति को पकड़ने में मदद करते हैं जो अंतिम रूप से गुनहगार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इंसाफ नहीं हो पाना समाज के लिए बहुत ही निरुत्साहजनक कारक है और फोरेंसिक विज्ञान के बगैर इस गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता है। फोरेंसिक विज्ञान अपराधी को न्याय के कठघरे में लाने के साधन से भी कहीं अधिक बड़ा है। वास्तव में, (इससे) अपराधी पर इंसाफ का शिकंजा तो कसता ही है, लेकिन यह बेगुनाही स्थापित करने में भी मदद करता है।’’
धनखड़ ने कहा कि चूंकि साइबर सुरक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हो रहा है, इसलिए यह संस्थाओं, समाज और व्यक्तियों के लिए चुनौती बन गया है और ऐसे अपराधों की जांच करने वाले अपराध विज्ञान के विशेषज्ञों की आवश्यकता बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने, वन्यजीवों के अवैध शिकार पर नजर रखने और पर्यावरण नियमों के अनुपालन की निगरानी करने में मदद कर जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी क्षरण से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने में एक विविध सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
भाषा राजकुमार