हमें गुमराह करने की कोशिश करने वाले लोगों से सावधान रहें: वी पी धनखड़
योगेश वैभव
- 21 Aug 2024, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कहा कि भारत ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है जब कुछ जानकार लोग जानबूझकर हमें गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, यह जानते हुए कि वे सही मार्ग पर नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के सामने चुनौतियां हैं और वह उनका सामना करेगा, लेकिन देश के भीतर के बुद्धिजीवियों से आने वाली चुनौतियां अस्वीकार्य हैं।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धनखड़ ने पिछले महीने लागू हुए तीन नए आपराधिक न्याय कानूनों का उल्लेख किया और इस बात पर अफसोस जताया कि कई प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता जो राज्यसभा के सदस्य भी हैं, वे इस पर हुई चर्चा में शामिल नहीं हुए।
उन्होंने कहा, "उन्हें चर्चा में भाग लेना चाहिए था, उन्हें योगदान देना चाहिए था।"
उन्होंने विधेयकों के खिलाफ बोलने वाले कुछ विपक्षी नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं इन अग्रणी लोगों का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन मुझे इस बात से बहुत दुख होता है कि ये सज्जन सार्वजनिक रूप से इस तरह शोर मचा रहे हैं जैसे कि राज्यसभा में कुछ हुआ ही नहीं।"
धनखड़ ने कहा कि उनमें से एक पूर्व वित्त मंत्री और नियमित स्तंभकार (पी चिदंबरम का स्पष्ट संदर्भ) ने कहा कि उन्होंने गृह मामलों की स्थायी समिति के समक्ष आपत्तियां दी हैं, लेकिन ये आपत्तियां तीन पृष्ठों से भी कम थीं।
उपराष्ट्रपति ने चुटकी लेते हुए कहा, "मुख्य आपत्ति यह थी कि मौत की सजा नहीं होनी चाहिए। क्या यह आतंकवादियों, बलात्कारियों और देश के दुश्मनों को बचाने का प्रयास है?"
उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति के व्यवहार में इतना विरोधाभास। जब निर्भया जैसी दर्दनाक घटना हुई, तब वह सरकार में थे।"
उन्होंने कहा कि भारत ऐसे समय का सामना कर रहा है जब जानकार लोग, ज्ञानवान लोग, संविधानवाद में विश्वास रखने वाले लोग, जो शासन का हिस्सा थे, वे हमें गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि वे सही रास्ते पर नहीं हैं।
स्पष्ट रूप से कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर की ओर इशारा करते हुए धनखड़ ने कहा कि दो व्यक्तियों जिनमें एक पूर्व मंत्री और कानूनी बिरादरी के सदस्य हैं, तथा दूसरे भारतीय विदेश सेवा के सदस्य रहे हैं, ने कहा कि पड़ोसी देश में जो हुआ, वही भारत में भी हो सकता है।
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